नेता कह रहे इस कारण नहीं हुई बड़े नेताओं की जनसभा


आशुतोष रंजन
गढ़वा

केवल मैं ही नहीं आप भी अपने बचपन में जब जब लोकसभा और विधानसभा का चुनाव आता था तो दो इंतज़ार बड़ा बेसब्री से रहा करता था एक तो हेलीकॉप्टर देखने का तो दूसरी ओर भले उनकी बात समझ में ना आवे लेकिन उस हेलीकॉप्टर से उतरने वाले नेताओं को देखने का,वक्त गुजरता गया चुनाव होते रहा हेलीकॉप्टर और नेता आते रहे और दोनो को देखने की चाहत पूरी होती गई लेकिन वर्तमान गुजरता हुआ शायद यही एक चुनाव है जब गढ़वा के बचपन के साथ साथ सभी की आस अधूरी रह गई क्योंकि मुख्यालय में किसी बड़े नेताओं की जनसभा नहीं हुई |

गढ़वा में अधूरी रह गई बड़े नेताओं को देखने की आस : – सभी राजनीतिक पार्टियों में भले समंदर है नेताओं की,पर अधूरी रह गई उन्हें देखने की आस,जी हां मेरा लिखा हुआ यह लाइन आपको तुकबंदी भले प्रतीत हो रहा हो पर आप भी बेशक सोच रहे होंगे क्योंकि एक आस सबके मन में जगी थी की जिन नेताओं द्वारा बोले गए बातों को अखबारों में पढ़ते और टीवी चैनलों में सदृश्य सुनते हैं बस उन्हें ही तो अपने यहां देखने और उनके द्वारा कही जाने वाली बातों को सुनने की चाहत थी पर पूरा चुनाव गुज़र गया पर किसी बड़े स्तर के केंद्रीय नेताओं का गढ़वा आना नहीं हुआ,जब चुनावी प्रचार शुरू हुआ तो एक चर्चा हुई की जहां एक ओर भाजपा के बड़े ओहदेदार नेताओं का गढ़वा आने का कार्यक्रम तय हो चुका है संभावना है की फलाने रोज़ अमुक जगह के मैदान में इनकी जनसभा होगी तो वहीं दूसरी ओर भाजपा को सत्ता से हटाने को आमादा इंडिया गठबंधन जो पूरी दमखम के साथ जुटा हुआ है उसके द्वारा ज़रूर केंद्रीय नेताओं का कार्यक्रम तय किया गया होगा पर ऐसा नहीं हो सका,लोग हर रोज़ इंतज़ार करते रहे और प्रचार की निर्धारित तिथि जैसे ही ख़त्म हुई उसके साथ ही आस भी अधूरी रह गई |

आख़िर क्यों नहीं हुई नेताओं की जनसभा : – गढ़वा में किसी बड़े नेताओं की जनसभा क्यों नहीं हुई यह सवाल जहां सबके जेहन में कौंध रहा है तो वहीं चौक चौराहों पर लोग चर्चा करते हुए एक दूसरे से पूछ भी रहे हैं जिसके ज़वाब में लोग कई तरह की बातें कर रहे हैं,जहां एक तरफ़ भाजपा नेताओं का कहना है की किन बड़े नेताओं को देखने और उनकी बातों को सुनने की चाहत आपलोग कर रहे हैं अरे भाई जब मोदी जी ही पलामू आ गए तो फ़िर उनसे भी बड़ा नेता हमारी पार्टी का कौन है,वो आए भी और जो कई नेता आ कर बोलते वो अकेले ही उन सभी बातों को बोल जाने के साथ साथ अपने अंदाज़ में वोटिंग अपील कर गए,और साथ ही देखिएगा की कैसे हमारे प्रत्याशी एक बड़े अंतर के साथ जीत की हैट्रिक लगाते हैं,तो उधर महागठबंधन के नेताओं की माने तो बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव,मुकेश साहनी और फायर ब्रांड महिला नेत्री कल्पना सोरेन का आना हुआ ही जो अपनी बातों से वोटरों को प्रत्याशी के पक्ष में गोलबंद कर ही गए अब और किसकी आस जोह रहे हैं,लेकिन दोनो की बातों को सुनने के बाद लोगों ने पहले भाजपा नेताओं को कहा की जब आपके लिए मोदी हीं सर्वमान्य हैं तो फिर पिछले विधानसभा चुनाव में योगी और अमित शाह और राजनाथ सिंह के साथ साथ कई बड़े नामवर नेताओं की सभा क्यों कराई गई थी,जिसके ज़वाब में नेताओं ने कहा की भाई मेरे वो विधानसभा का चुनाव था और यह लोकसभा का चुनाव है और इसमें मोदी को छोड़ किसी का क्यों आना जब वोअकेले ही काफ़ी हैं पलामू से प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए,तब लोगों ने गठबंधन के नेताओं से भी पूछ ही लिया की आपके पास भी बड़े नामधारी नेताओं की एक बड़ी फ़ौज है फिर भी उनका कार्यक्रम गढ़वा में तय क्यों नहीं हुआ,क्या आपने बिना चार जून आए और मतों की गिनती हुए अपना हार मान लिए,तो नेताओं ने ज़वाब में कहा की जो काम तेजस्वी,कल्पना सोरेन और मुकेश साहनी ही कर गए तो फिर बड़े नेताओं का क्यों कर आना,जहां तक सवाल हार मान लेने की है तो आप सभी को बताऊं की आप भले हमसे ऐसा पूछ रहे हैं जबकि आपका दिल ख़ुद गवाही दे रहा है की इस बार पलामू के लोगों ने महागठबंधन की प्रत्याशी के प्रति अपना मन बना लिया है और जीत निश्चित है |

खैर वो सत्तापक्ष हो या विपक्ष सभी नेताओं के जीत को ले कर अपने अपने दावे हैं अब तो चार जून को आने वाला परिणाम ही बताएगा की हेलीकॉप्टर और बड़े नेताओं को देखने की आस भले अधूरी रह गई हो लेकिन उसके बावजूद भी जो भी नेताओं का आना हुआ वो अपनी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में वोटरों को कितना जुड़ाव करा पाए,इसके साथ ही यह भी ज़रूर कहना चाहूंगा की कल मतदान का रोज़ है आप किसी को मतदान करें वो बात अलग है लेकिन आपसे Bindash न्यूज़ की यही अपील है की आप अपने मताधिकार के प्रयोग से वंचित ना रहें भारतीय लोकतंत्र में एकमात्र यही तो आपका अधिकार है जिसका दिली संजीदगी से उपयोग करना बेहद ज़रूरी है |