क्या उसे सफेदपोशों का सरंक्षण प्राप्त है..?


आशुतोष रंजन
गढ़वा

झारखंड के गढ़वा जिला को नक्सलियों से पूरी तरह मुक्त करा लेने और इस बार के लोकसभा चुनाव को शहर के साथ गांव एवं बूढ़ा पहाड़ के इलाके में भी मतदान करा कर सफ़लता का परचम लहराने वाली पुलिस प्रशासन के हाथ हेरोइन कारोबारी के गिरेबान से दूर क्यों है यह एक बड़ा सवाल है जो दशकों से अनुतरित रहने के बाद भी अब तलक नाजवाब ही है

कौन है गढ़वा का हेरोइन का बड़ा कारोबारी : – शायद यह बताने की ज़रूरत नहीं है बल्कि आप सभी वाक़िफ हैं की गढ़वा के गांव देहात से कहीं ज़्यादा शहरी मुख्यालय में हेरोइन का बड़ा कारोबार होता है जो कई दशकों से अनवरत ज़ारी है,क्या मोहल्ला क्या उस पान का दुकान कई ऐसे स्थल हैं जहां से हेरोइन का अवैध कारोबार होता है,सूत्रों की माने तो एक बड़ा कारोबारी ऐसा है जिसके द्वारा बाइक से शहर के साथ साथ गांव पहुंच कर हेरोइन की बिक्री की जाती है,इसका सेवन करने वाले कल तक व्यस्क थे लेकिन वर्तमान गुजरते वक्त में इसके गिरफ्त में युवा वर्ग आ गए हैं,जिससे कई घर सीधे रूप में बर्बाद हो रहे हैं |

क्या उसे सफेदपोशों का संरक्षण प्राप्त है : – ऐसी बात नहीं की इस दिशा में पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई है,कई बार कारोबारियों की हेरोइन के साथ गिरफ़्तारी हुई है लेकिन उसके बाद भी कारोबार बदस्तूर ज़ारी है,साथ ही कहा जाता है की पुलिस थाना और वहां के प्रभारी को सभी अवैध धंधों के बावत सारी जानकारी होती है,तभी तो वक्त बे वक्त सूचना के आलोक में कार्रवाई होती है,लेकिन सवाल उठता है की बड़े कारोबारी अब तलक क्यों गिरफ्त से बाहर है,कहीं ऐसा तो नहीं की उन कारोबारियों को सफेदपोशों को बरदहस्त हासिल है जिस पर हाथ डालने में देर हो रही है,ज़रूरत है इस दिशा में कंक्रीट रूप में कार्रवाई करने की ताकि जहां एक ओर कारोबारी के साथ उसे सहयोग और संरक्षण देने वाले सफेदपोशों के शरीफी नक़ाब वाला चेहरा बेनकाब हो तो वहीं दूसरी ओर जिला को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का पुलिस कप्तान का दिली लक्ष्य हासिल हो |