मत दीजिए उलाहना,कीजिए सराहना…क्योंकि..?


आशुतोष रंजन
गढ़वा

नए समाहरणालय में स्थित सामान्य शाखा के छत प्लासटर के गिरने को ले कर चर्चा करने के साथ साथ संवेदक को दोषी ठहराया जा रहा हो लेकिन जहां एक ओर इसमें सीधे रूप में संवेदक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता तो वहीं दूसरी कोई यह नहीं कह रहा की ऐसे भी संवेदक हमारे गढ़वा में हैं जिनके द्वारा बिना योजना राशि के भुगतान हुए बगैर इतने बड़े निर्माण को निर्धारित समय से पहले पूरा कर दिया गया,यहां बताने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि आप बख़ूबी वाकीफ हैं की उक्त निर्माण योजना के संवेदक को निर्माण को ले कर जो समय दिया गया था उनके द्वारा उक्त निर्माण को उससे पहले पूरा कर लिया गया,यहां पर यह भी बताना बेहद ज़रूरी है की पहले से कई बड़े निर्माण में उलझे होने के कारण संवेदक द्वारा इसे बनाने हेतु इनकार कर दिया गया था लेकिन जिला से ले कर राज्य के कई जिलों में बड़े योजनाओं को ससमय पूर्ण कर लेने की अहर्ता रखने को नज़र करते हुए स्थानीय विधायक सह मंत्री एवं विभाग द्वारा उन्हें ही निर्माण हेतु आमंत्रित किए जाने के साथ साथ उनसे अनुरोध भी किया गया तब जा कर उनके द्वारा समाहरणालय निर्माण की शुरुआत की गई,उसके साथ साथ तीन अन्य बड़ी योजना को भी उन्हें ही कार्यरूप देने को कहा गया,आप कालांतर से वर्तमान तक देख रहे हैं की कैसे अन्य संवेदकों द्वारा योजनाओं को कार्यरूप दिया जाता है,लेकिन शुरुआत से पूर्ण होने और फिर उद्घाटन होने के बाद आपके द्वारा जब सभी को नज़र किया गया था तो आप कैसे आह्लादित हुए थे,अपने उसी ज़ुबान से आप संवेदक के कार्यों की सराहना करते नहीं थक रहे थे तो आज एक छोटा सा प्लासटर गिरने के बाद आप उसी ज़ुबान से उलाहना भी दे रहे हैं,जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि इसमें संवेदक कहीं से भी दोषवार नहीं हो सकता क्योंकि यह कोई छोटी से पुलिया नहीं है बल्कि एक बड़ी निर्माण योजना है जिसमें हर क़दम इंजीनियरिंग विभाग द्वारा उसे देखा और परखा जाता है तब कहीं जा कर आगे का निर्माण शुरू होता है,जब निर्माण पूरा हुआ होगा तो उक्त विभाग द्वारा OK कहा गया होगा तभी उसका उद्घाटन हुआ होगा,अब आप ही बताइए जब विभाग एवं इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट द्वारा OK कह दिया गया तब भला संवेदक कैसे कसूरवार हुआ,ऐसे में उलाहना ही जगह उसी तरह सराहना दीजिए जिस तरह निर्माण पूरा होने के बाद आपके द्वारा कहा जा रहा था क्योंकि गढ़वा के ऊपर लगे पिछड़ेपन के कलंक को धोने के लिए अनवरत प्रयासरत मंत्री मिथिलेश ठाकुर के साथ ऐसे संवेदक की भूमिका महत्वपूर्ण है,कहीं ऐसा ना हो की आपकी उलाहना उनके मन में ऐसा घर कर जाए की वो यहां कोई भी निर्माण में अपनी सहभागिता देने की जगह यहां से परहेज़ ही कर लें,क्योंकि वो एक बड़े और स्थापित संवेदक हैं उनकी कार्यदक्षता को देखते हुए उन्हें इस जिला के अलावे कहीं भी काम मिलेगा लेकिन अपना जिला विकास के मामले में अग्रणी बनने से वंचित रह जाएगा