संदर्भ : सदर अस्पताल में मारपीट


आशुतोष रंजन
गढ़वा

झारखंड के गढ़वा सदर अस्पताल में घटित हुई मारपीट की घटना को एक खबरनवीस होने के नाते हम तो सराहना नहीं करेंगे क्योंकि यह कहीं से भी सही प्रतीत नहीं हो रहा,कारण की आप कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि ख़ास का दर्ज़ा रखने वाले एक जिम्मेवार प्रतिनिधि हैं,आप उस विधायक सह मंत्री के प्रतिनिधि हैं जो सत्ता में हैं,जिसका मायने है की आप पावर में हैं,कहा भी जाता है की जिस पेड़ फल से लदा होता है वो सीधा खड़ा नहीं बल्कि झूंका रहता है,कहने का मतलब की आप जब सत्ता में हैं तो आप पावर में हैं,आपमें गंभीरता होनी चाहिए,आपको संयमित होना चाहिए,ना की विचलित हो कर ऐसा क़दम उठा लेना चाहिए जिससे केवल आपकी ही नहीं बल्कि उसके दामन पर भी छींटे पड़ने लगे जिसके आप प्रतिनिधि हैं,हम बात यहां विधायक मिथिलेश ठाकुर के स्वास्थ्य विभाग के विधायक प्रतिनिधि कंचन साहू की कर रहे हैं,बात करने की वजह यह है की कंचन साहू के ऊपर सदर अस्पताल प्रबंधक के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है,उक्त आरोप के तहत ही उनके ऊपर प्राथमिकी तक दर्ज़ कराई गई है,लेकिन इन सब के बावजूद विपक्ष के साथ साथ अन्य शहरवासी भी कंचन के इस कृत्य की सराहना भी कर रहे हैं,आख़िर उस सराहना की वजह क्या है,आइए समझते हैं।

आख़िर क्यों सराह रहे लोग : – सच में आज यह गले से नहीं उतर रहा है की जिस कृत्य की कड़े अल्फाजों के साथ निंदा करनी चाहिए,जिसे ले कर उलाहना देना चाहिए आख़िर उसकी लोग सराहना क्यों कर रहे हैं,आप ही सोचिए की जब कंचन साहू ऐसे मज़बूत जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि हैं तो क्या उन्हें ऐसे मारपीट करनी चाहिए या सत्ताधीश से व्यवस्था सुधरवानी चाहिए,लेकिन उनके कृत्य को सही ठहराते हुए लोग उसे सराह रहे हैं,सबसे पहले हम बात यहां विपक्ष की करेंगे वो विपक्ष जो हर वक्त इस फ़िराक में रहा करता है की मंत्री के किसी अदना कार्यकर्ता या किसी पदधारी द्वारा कोई ऐसी गलती हो जाए जिसे सोशल मीडिया में उछालते हुए चुस्की लिया जाए,लेकिन यह क्या कंचन साहू द्वारा जब इतनी बड़ी गलती की गई तो उसकी निंदा करने की जगह विपक्षी उसकी सराहना कर रहे हैं,भाजपा के युवा नेता सह सांसद के मीडिया प्रभारी प्रवीण जायसवाल अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं की राजनीति अलग है लेकिन ऐसे लापरवाह डॉक्टर को सबक सिखाना हम युवाओं की ही जिम्मेवारी है,साथ ही उनके द्वारा लिखा जाता है की मेरा सपोर्ट हीरो कंचन साहू,यानी प्रवीण जायसवाल द्वारा कंचन साहू द्वारा किए गए कृत्य की केवल सराहना ही नहीं की गई बल्कि कंचन को हीरो भी बताया गया,आरटीआई कार्यकर्ता अजय उपाध्याय लिखते हैं की बीमार व्यवस्था से लड़ना सबकी जवाबदेही है इस खातिर सभी आगे आएं तभी अव्यवस्था समुचित व्यवस्था में परिणत हो पाएगा,उधर युवा लक्ष्य सोनी द्वारा भी अपना सपोर्ट कंचन साहू को देने की बात लिखते हुए हीरो कहा गया,दूसरी ओर अब हम उनकी प्रतिक्रिया लिखने जा रहे हैं जिनके द्वारा हर रोज़ सोशल मीडिया पर वर्तमान सत्ता के बारे में ऐसे ऐसे जहर बुझा तीर मारा जाता है जो अगर सीधे रूप में सत्ता से जुड़े लोगों को लग जाए तो प्राणघातक सिद्ध हो जाए हम बात नवनीत शुक्ला की कर रहे हैं जो इस घटना के बाद लिखते हैं की सदर अस्पताल व वहां के डाक्टरों की स्थिति का अंदाज़ा किसी ख़बर को पढ़ कर लगाने के बजाए वहां मरीज़ बन कर घूम आइए,व्यवस्था की सारी सच्चाई आपके सामने नुमाया हो जाएगी,सभी के कहने का मतलब बस यही है की लाखों की आबादी को समुचित इलाजीय व्यवस्था उपलब्ध कराने वाला सदर अस्पताल की व्यवस्था दयनीय है,जिसमें व्यापक सुधार की ज़रूरत है ताकि अपने मरीज़ के इलाज़ वास्ते वहां पहुंचने वाले परिजनों को किसी भी सूरत में आक्रोशित ना होना पड़े,लेकिन हम एक बार फ़िर से अंत में दुहराना चाहेंगे की सत्ता में होने के बाद भी कंचन साहू द्वारा की गई यह गलती तो सीधे रूप में गलत ही है,लेकिन साथ ही यह भी कहेंगे कि व्यवस्था ऐसी सुधर जाए की ऐसी नौबत ही ना आए।