बारिश कम वज्रपात ज्यादा होती है


आशुतोष रंजन
गढ़वा

सुखा के लिए अभिशप्त गढ़वा में बारिश के लिए लोग राह भले ताकें,लेकिन यहां अगर संयोग से बारिश हो भी जाए तो वो राहत की नहीं आफ़त की होती है,क्योंकि बारिश कम और वज्रपात ज्यादा होती है,अब आज की ही बात करें तो उमस भरी गर्मी से राहत दिलाने के लिए भले इस अल्प बारिश को बेहतर माना जाए लेकिन यह राहत से कहीं ज्यादा आफ़त ले कर आई क्योंकि बारिश के वक्त ही हुए वज्रपात में एक व्यक्ति की जान चली गई,आपको बताएं की शहर मुख्यालय से हो कर गुजरी पूरी तरह सुखी हुई दानरो नदी में टंडवा निवासी अरुण मेहता टहल रहे थे की उसी वक्त हुए वज्रपात ने उन्हें अपने चपेट में ले लिया जिससे एक ओर जहां उनकी मौत हो गई तो वहीं दूसरी ओर उनके पास ही खड़े दो अन्य लोग घायल हो गए,समाजसेवी दौलत सोनी ने बताया की यह वज्रपात नदी में नहीं बल्कि उस परिवार पर हुआ जिसके अरुण मेहता मुखिया थे,दौलत ने बताया की दोनो घायलों का इलाज़ अस्पताल में चल रहा है