इस नारकीय हालात का दोषी कौन…?


आशुतोष रंजन
गढ़वा

पर्याप्त बारिश का होना झारखंड के सुखा प्रभावित गढ़वा जिले के लिए भले वरदान साबित होता हो,लेकिन यही बारिश शहर के लिए अभिशाप प्रमाणित होता है,क्योंकि जहां एक ओर बारिश नहीं होने की सूरत में खेत रहते हुए भी ग्रामीण इलाकों में लोग सुखा के कारण भूमिहीन के साथ साथ अन्न विहीन का जीवन जीते हैं तो वहीं दूसरी ओर व्यवसाय के कारण संपन्न होने के बावजूद भी शहर के लोगों के लिए यही बारिश आफ़त साबित होती है क्योंकि ज्यादा नहीं बल्कि कुछ देर की बारिश ही उनके लिए जी का जंजाल बन जाता है,कारण की शहर मुख्यालय के बाज़ार इलाक़े में पानी भर जाने के कारण सड़कों पर लोगों का चलना दुभर हो जाता है,तो उधर अगर कुछ देर की बारिश हो जाए तो लोगों के दुकानों में भी पानी घुस जाया करता है,उधर हर बार वो चाहे नगर परिषद का चुनाव हो या विधानसभा का हर बार व्यवसाइयों से उनके इस विषम हालात से उबारने का वादा किया जाता है परंतु ठीक चुनाव बाद बात आई गई हो जाती है और व्यवसायी उसी करुण हालात से दो चार होते रहते हैं,ऐसे में ज़रूरत है उनके गंभीर हालात को गंभीरता से लेते हुए उनकी परेशानियों को दूर करने की ताकि कहीं ऐसा ना हो की व्यवसायियों के दिल में जनप्रतिनिधि के लिए मोहब्बत की जगह नफ़रत घर कर जाए…?