सोचिए कैसा महसूस होता होगा…?


आशुतोष रंजन
गढ़वा

हम आप दो पहिया और चार पहिया वाहन चलाया करते हैं,कोई जल्दी गंतव्य तक पहुंचने के लिहाज़ से तो कोई शौक़ से ज़रा तेज़ गाड़ी चलाता है,ऐसे तो नियमानुसार तेज़ चलाना सही नहीं होता लेकिन हम आप इसे स्वीकारते कहां हैं,आम दिनों में जब मौसम अनुकूल होता है तो ठीक है लेकिन जब बारिश का मौसम होता है और वो गांव हो या शहर सड़कों पर कहीं कहीं पानी होता है ऐसे में हम आप अपने दो पहिया और चारपहिया से वहां से जब गुजरते हैं तो कई बार अनजाने में तो कभी कभी मन में ऐसा भी होता है कि चलो गाड़ी कुछ तेज़ चलाएं ताकि पानी ऊपर तक उड़ता हुआ दिखाई दे जिसे देख हम आनंदित हों,लेकिन ऐसा करने में यह भूल जाते हैं कि हम तो गाड़ी के अंदर हैं लेकिन उसी सड़क पर उसी पानी से बचने के लिए कई राहगीर पैदल भी चल रहे हैं जिसके ऊपर उड़ता हुआ पानी पड़ सकता है और उनके कपड़े गिले हो सकते हैं,लेकिन इसे हम आप नजरअंदाज कर देते हैं और पानी उड़ाते हुए तेज़ी से निकल जाते हैं और उधर पानी से भींगे और कीचड़ से सने हुए लोग कभी जाती हुई गाड़ी तो कभी अपने आप को देखते हुए दिली कसक के साथ आगे बढ़ जाते हैं,पर सबसे ज़्यादा उनकी आंखे लरज़ पड़ती हैं और वो मन में एक टीस लिए घर को जाती हैं जब स्कूल की वो छोटे बच्चे और बच्चियां पानी भरे सड़क के किनारे से गुजरते वक्त तेज़ गाड़ियों के गुजरने से पानी और कीचड़ से सन जाती हैं,अब यहां हम आप ज़रा दिल पर हाथ रख कर सोचिए कि जिस बच्चे और बच्चियों के पास एक ही ड्रेस होता है और वो उसी के सहारे पढ़ने की ललक को पूरा करते हैं लेकिन जिस रोज़ सड़क पर उनका ड्रेस पानी में भींग जाता है और कीचड़ में ख़राब हो जाता है तो अगले रोज़ वो स्कूल नहीं जा पाते,ऐसे में बस यही सोचना है कि हमारे आपके पास दो गाड़ियां हो सकती हैं लेकिन हमारे ही समाज में ऐसे भी लोग हैं जिनके बच्चे पास दो जोड़ी ड्रेस नहीं होते इसीलिए कहना है कि बरसात के मौसम में जब भी गाड़ी चलाएं तो सावधानी ज़रूर बरतें।