Bindash News || एक तरफ़ उठती रही "वेदना",दूसरी ओर मरती रही "संवेदना"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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एक तरफ़ उठती रही "वेदना",दूसरी ओर मरती रही "संवेदना"

Bindash News / 06-10-2018 / 857


सरकारी सितम से बिलख रहा प्रीतम

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
मर गयी संवेदना,मिट गयी नैतिकता,आयी सामने सरकारी विभाग की वास्तविकता,जी हां आज गढ़वा में शिक्षण संस्थान सहित शिक्षा विभाग की मानवता उस वक्त शर्मसार हुई जब स्कूल में जले बच्चे के इलाज से स्कूल प्रबंधन सहित विभाग ने भी खुद को किनारे कर लिया,उधर अपने बच्चे की जान बचाने के लिए रोते-बिलखते दर दर भटक रहे मां-बाप,मरती संवेदना को परिलक्षित करती एक खास रिपोर्ट-
 
देखिये वास्तविकता:- नारा कुछ,नियत कुछ,जी हां शिक्षा विभाग की कुछ यही वास्तविकता आज सामने आयी,एक तरफ कोई बच्चा छूटे ना सहित सबको पढ़ाने का नारा देने वाला स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग आज अपने स्कूल के एक बच्चे को दर्द से बिलबिलाने और उसके अहसास से परिवार को बिलखने के लिए छोड़ दिया।
 
सरकारी सितम से बिलख रहा प्रीतम:- अपने पिता की गोद में बैठा महज़ छह साल का यह प्रीतम ज़ख्म से ज़्यादा अपने स्कूल और शिक्षक के सितम से स्याह हुआ है,क्योंकि मेराल प्रखंड के लातदाग मध्य विद्यालय में पढ़ने वाला उक्त प्रीतम मध्यान्ह भोजन लेने जाने के दौरान दाल से जल गया,वह उसी स्कूल के ऊपरी कक्षा में पढ़ रही बहन के गोद में बैठ कर वह दर्द से बिलबिलाता रहा लेकिन वाह रे स्कूल प्रबंधन,उसे इलाज के लिए ले जाना भी मुनासिब नहीं समझा,कुछ देर बाद पहुंचे उसके परिजन उसे इलाज के लिए ले कर जिला मुख्यालय पहुंचे,प्रीतम के पिता कहते हैं कि स्कूल के प्राचार्य अंसारी द्वारा मेरे बेटे को जानबूझ कर जलाया गया है।
 
जलाए जा रहे हैं मेरे बच्चे:-आख़िर क्या बात है कि मेरे बच्चे ही जल रहे हैं,यह बात वह मां कह रही है जिसे अपने बेटे का दर्द बर्दाश्त नहीं किया जा रहा,जार-बेज़ार रोती हुई वह कहती है कि आज से ठीक तीन माह पहले मेरी छोटी बच्ची उसी स्कूल में दाल से ही जली थी,जिसका ज़ख्म अभी ठीक से भरा भी नहीं है कि आज फ़िर बेटा जल गया,उधर इलाज़ से स्कूल प्रबंधन सहित विभाग को खुद से परे करने से मां-बाप पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है,क्योंकि दिन भर मेहनत मजदूरी कर रात में दो कौर निवाला खाने वाले बेटे का इलाज कराएं तो कैसे ?
 
वह नहीं ले रहे जिम्मेवारी:- जिस पर है जवाबदारी,वह नहीं ले रहे जिम्मेवारी,हम बात कर रहे हैं शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारी की,क्योंकि जिले में शिक्षा को ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प लेने वाले अधिकारी अपनी सोच को कितना निम्न रखते हैं यह तब परिलक्षित हुआ जब हमने उक्त बच्चे के इलाज के बाबत पूछा,तो उनके द्वारा साफ़ तौर पर यह कह कर इनकार कर दिया गया कि वह इलाज़ नहीं करा सकते,यह काम किसी और का है।
 
एक तरफ़ जहां बच्चा जलन के दर्द से बिलबिला रहा है वहीं ग़रीब,लाचार मां बाप बेटे को बचाने को ले कर बिलख रहे हैं,उधर सरकारी बाबुओं की मर चुकी मानवता उन्हें और टीस दे रहा है,ऐसे में मन से बरबस यही निकलता है कि वहां उठ रही वेदना,यहां मर रही संवेदना।
 
 

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