Bindash News || "साहेब" ना बनिये बेदर्द,ज़रा समझिए "दिव्यांग" का दर्द
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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"साहेब" ना बनिये बेदर्द,ज़रा समझिए "दिव्यांग" का दर्द

Bindash News / 05-02-2019 / 725


अब ख़त्म होगा खींचतान,जल्द होगा भुगतान:डीडीसी

 
आशुतोष रंजन
 
गढ़वा
 
सूना है सबकी सुनते हो,हमारी भी सुनो,इसी कसक भरे गुहार-ए-आवाज के साथ सबका साथ और सबका विकास का दावा करने वाली सरकार के राज्य में एक एक पैसे को मोहाल भूख से व्याकुल क्षुधा को शांत करने के लिए एक अदद पेंसन राशि की मांग करते हुए सरकारी चौखट पर एड़िया रगड़ रहा है एक दिव्यांग,पर बेदर्द और बेरहम सरकारी साहब को कहां है उसके दर्द का अहसास,आइये पढ़िए यह रिपोर्ट-
 
जिसके दिल की धरा नरम होती है:- सच कहा गया है दुब का दर्द वही समझता है जिसके दिल की धरा नरम होती है",यह पंक्ति उस वक्त अक्षरसः चरितार्थ होती दिखी जब गढ़वा में हमने एक दिव्यांग को घिसट घिसट कर किसी प्रकार जिला समाहरणालय स्थित कार्यालय के पास पहुंचते देखा,यह कोई पहली दफ़ा नहीं है,हम वहां मौजूद थे तो हमारी नजर पड़ी,लेकिन वह दिव्यांग पुरे दो साल से इसी तरह जिला कार्यालय पहुंच एड़िया रगड़ रहा है,पर कहीं से भी उसे राहत नहीं मिल रही,मामला उसके पेंसन से जुड़ा है,विभाग की लापरवाही के कारण दो साल से उसे पेंसन मिलना बंद है,नतीजा है कि वो भूखों मरने को विवश है,वह बताता है कि इसी प्रकार घिसटते हुए किसी तरह यहां पहुंचता है,इसी तरह विभाग के दर पर पहुंचना उसकी लाचारी बन गयी है,लेकिन हर बार एक आस ले कर आना और पूरा नहीं होने पर मायुष हो कर लौट जाना नियति भी बन गयी है,उधर पास में पैसा नहीं रहने के कारण दो कौर भोजन मिलना मोहाल हुआ है,पूरी तरह लाचार वह जब कातर निगाहों से किसी की ओर देखता है तो उसे इस हालात में हर देखने वालों का कलेजा फट पड़ता है,पर हाय रे बेरहम साहब जिनकी नजरें इसकी ओर से परे हो कर कठोर बनी हुई हैं।
 
नहीं हो रही कहीं सुनवाई:- है ऐसी विपदा आयी,पर नहीं हो रही कहीं सुनवाई",उधर अपने दिव्यांग पोते को किसी तरह पचास किलोमीटर दूर घर से जिला कार्यालय ले कर पहुंचने वाले उसके दादा कहते हैं कि आज पिछले दो सालों से इसे पेंसन मिलना बंद है उसी ख़ातिर इसे ले कर पंचायत से प्रखंड और प्रखंड से ले कर जिला कार्यालय दौड़ लगाता हूं,पर कहीं से भी कोई सुनवाई होता नहीं दिख रहा है।
 
जल्द होगा भुगतान:- दूर होगा खींचतान,जल्द होगा भुगतान",यह बात सही है कि संबंधित विभाग के कर्मचारी और अधिकारी के कारण ही ऐसे लाचारों को कष्ट भोगना पड़ता है,क्योंकि जब हमने इस दिव्यांग के बावत जिला के वरीय अधिकारी को बतायी तो अधिकारी ने कहा कि उसे यहां आने की जरूरत नहीं है केवल उसका आवेदन मिल जाये बस उसे पिछले बकाए के साथ साथ उसका पेंसन भी शुरू हो जाएगा।
 
ना थी उम्मीद होगी हालत ऐसी,पल पल हो रही है विकराल अपनी मुफ़्लिसि,ऐसे में अब जरुरत है सरकारी स्तर पर जल्द राहत पहुंचाने की,ताकि एक दिव्यांग की ज़िंदगी महफ़ूज रह सके।
 
 

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