Bindash News || बड़ी "कठिन" है यह "चुनावी डगर"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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बड़ी "कठिन" है यह "चुनावी डगर"

Bindash News / 28-04-2019 / 962


व्यवस्था है जब पूर्ण,तो चाहेंगें की चुनाव गुज़रे शांतिपूर्ण


आशुतोष रंजन
गढ़वा

चुनाव कोई भी हो उसे झारखंड में शांतिपूर्ण संपन्न कराना जहां एक बहुत बड़ा सवाल होता है,वहीं दूसरी ओर राज्य के कई ऐसे जिले हैं जहां चुनाव कराना बहुत बड़ी चुनौती होती है,क्योंकि चुनाव के राह में नक्सली सबसे बड़े बाधक होते हैं,कौन कौन हैं वह जिले,किस तरह बाधक बनते हैं नक्सली और कितना तैयार है प्रशासन जानने के लिए आइये पढ़ते हैं यह ख़ास रिपोर्ट-

यहीं तो चुनौती है कराना चुनाव:- वैसे तो पूरा झारखंड नक्सल प्रभावित है लेकिन राज्य का गढ़वा,पलामू,लातेहार,चतरा और लोहरदगा ये वो जिले हैं जो सबसे ज़्यादा नक्सल प्रभावित हैं,यहां चुनाव कौन कहे आम दिनों में भी नक्सली घटनाओं को अंजाम दिया करते हैं,लेकिन जब चुनाव आता है तो जहां एक तरफ़ किसी अनहोनी को ले कर लोग आतंकित होते रहते हैं तो दूसरी ओर इन जिलों के प्रशासन को भी विशेष तैयारी करनी पड़ती है,हम बात यहां गढ़वा पलामू और लातेहार जिले की करें तो यहां पिछले तीन सालों से नक्सली एक पहाड़ पर डेरा जमा अपनी गतिविधि को अमलीजामा पहना रहे हैं,वह है बूढ़ा पहाड़ जिसके जद्द में यह तीनों जिले आते हैं,हां यह बात जरूर है कि उन्हें वहां से खदेड़ने का पुलिसिया अभियान भी अनवरत जारी है लेकिन नक्सली उक्त पहाड़ पर अब तलक जमे हुए हैं,ऐसे हालात में चुनाव को संपन्न कराना कितना कठिन है बेशक समझा जा सकता है,लेकिन फिर भी दृढ़ संकल्प के साथ प्रशासन चुनाव को शांतिपूर्ण संपन्न कराने को ले कर कार्य में जुटा हुआ है,आपको बताएं कि एक सोची समझी रणनीति के तहत इन जिलों में प्रशासन द्वारा नक्सल प्रभावित बूथों पर मतदानकर्मियों को भारी सुरक्षा के बीच दो दिन पहले ही भेज दिया गया है,कुछ केंद्रों पर तो उन्हें सड़क मार्ग के बजाए हेलिकॉटर से भेजा गया है,उधर सभी विषम हालात से सामना करते हुए चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेवारी लेने वाले उपायुक्त हर्ष मंगला कहते हैं कि पूरी तैयारी कर ली गयी है,हर विपरीत स्थिति से निबटने के लिए प्रशासन तैयार है हम शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न करा लेंगें।

पुलिस भी है तैयार:- यह बात सर्वविदित है कि नक्सली शुरू से ही चुनाव का विरोध किया करते हैं,उनके द्वारा पूर्व में चुनाव के करीब और चुनाव के दौरान की गयी कई छोटी बड़ी घटनाएं इतिहास में दर्ज हैं,इस चुनाव की बात करें तो एन चुनाव से कुछ दिनों पहले जहां गढ़वा से सटे पड़ोसी राज्य छतीसगढ़ में नक्सलियों ने भाजपा विधायक को मार डाला वहीं दूसरी ओर अभी पांच दिनों पहले पलामू जिले के हरिहरगंज बाजार में भाजपा के चुनावी कार्यालय को बिस्फोट करा ध्वस्त करने के साथ साथ पुल निर्माण कार्य मे लगी गाड़ियों को जला दिया,कहने का मतलब की इन घटनाओं को अंजाम दे कर नक्सलियों ने चुनाव का विरोध करने के साथ साथ अपनी उपस्थिति भी दर्ज करा दी,अब ऐसी घटनाओं के बाद भी चुनाव शांतिपूर्ण से गुजरे इस निमित पुलिस प्रशासन पूरी कवायद में जुटी हुई है,अभी हाल ही में जहां एक तरफ पलामू में वरीय पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई वहीं गढ़वा मुख्यालय में भी बैठक कर तैयारी की समीक्षा की गयी,पुलिस के वरीय अधिकारी भले अपने आप को पूरी तरह से तैयार बता रहे हों लेकिन बूढ़ा पहाड़ पर नक्सली मौजूद हैं ऐसा कह कर अधिकारी खुद यह बता जाते हैं कि इस चुनाव में उनके लिए नक्सली बहुत बड़ी चुनौती हैं।

एक तरफ लोकसभा का यह चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हो इस निमित पूरे राज्य का प्रशासनिक महक़मा जुटा हुआ है,लेकिन इधर नक्सली भी चुनौती बने हुए हैं इसे भी नहीं झुठलाया जा सकता,अब ऐसे हालात के बाद भी हम यही चाहेंगें की बिना किसी अवरोध के यह चुनाव संपन्न हो।

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