Bindash News || आइये उनके "सपने" को पूरा करें...
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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आइये उनके "सपने" को पूरा करें...

Bindash News / 12-12-2019 / 2804


भानु प्रताप शाही के फेसबुक वॉल से


आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
पिछले एक तारीख़ को हुई एक सड़क दुर्घटना में यूपी के नगवां प्रखंड प्रमुख प्रशांत सिंह समेत चार लोगों की मौत हो गयी,प्रशांत सिंह भानु प्रताप शाही के भांजे भी थे,अब चुनाव संपन्न करा लेने के बाद एकाएक उनका चले जाना और अंतिम बार यह कहना कि हमने अपना काम कर दिया अब आपलोग विजयी जुलूस की तैयारी कीजिये मैं उसी में आऊंगा,मौत का दुख तो असहनीय है ही लेकिन उससे भी कहीं ज़्यादा उनके द्वारा कही गयी वो अंतिम बात भानु प्रताप शाही को ज़्यादा साल रही है,वो मनहूस एक तारीख़ के बाद कई दिनों तक एकदम ख़ामोश रहने वाले भानु ने अब कुछ कुछ बोलना शुरू जरूर किया है लेकिन रह रह कर वो विचलित हो रहे हैं,पर किसी भी विपरीत परिस्थितियों में धैर्य नहीं खोना इन्होंने भांजे प्रशांत से ही सीखा था सो दुख से तो आजीवन उबर नहीं सकते लेकिन संभलना चाह रहे हैं,और साथ ही उनके द्वारा अपने दिल की बात किस तरह व्यक्त की जा रही है आइये आपको आगे पढ़ाता हूं जो उन्होंने संक्षिप्त में ही सही बहुत कुछ लिख दिया है,जिसे हमने उनके फेसबुक वॉल से लिया है।
 
आइये उनके ख़्वाब को हक़ीक़त बनाएं:- प्रशांत  हमेशा प्रसन्नचित्त रहने वाले व्यक्तित्व का नाम था,कभी किसी से नाराज भी नही रहे होंगें और ना ही कोई कार्य कर उसका श्रेय लेने की आदत ही रही,साइलेंट परफार्मर प्रशांत जैसे ही होते हैं,जो नामुमकिन को मुमकिन में बदलते हैं,पर ऐसा नही लगता था दुनिया के रंग मंच में इतने कम दिनों के लिए प्रशांत अभिनय करने आये हैं तभी तो पल भर में किसी का दिल जीत लेना प्रशांत की फितरत थी,बेहतर करने के बाद भी यदि कोई आरोप लगा दे तो उससे बिना विचलित हुए कार्य में लगे रहना उनकी पहचान थी,आज के दौर में प्रशांत होना आसान नही,क्योंकि यहां सबको प्रसिद्धि चाहिए,हर काम के बाद वाह वाही चाहिए पर प्रशांत की तो मात्र एक ही चाहत थी बस उसके भानु (मामा) राजनीति में सूर्य के मानिंद चमकते रहें और एक ऐसी ऊंचाई प्राप्त करें जहां लोग देख कर गर्व करें,जब भी कोई मंशा नियत पर सवाल उठाया,तो खुद को साबित भी किया,नवजवानों को साथ लेकर सत्ता और गढ़ परिवार से एक साथ टक्कर लेने की रणनीति हो या अपने खिलाफ चल रहे राजनीतिक षडयंत्र को विफल करने की बात सब में भानु के साथ प्रशांत थे, प्रशांत के रहते न तो भानु कभी अकेले थे और न ही तन्हा,भानु के लिए भरोसे और विश्वास का दूसरा नाम प्रशांत था,पर सब कुछ करने के बाद प्रशांत ऐसे सबको छोड चले जायेंगें ऐसा कोई सोचा नही था,वादा तो यह करके गये की आप लोग तैयारी करिये अब हम विजयी जूलूस में आयेंगें, बस इसे याद कर पल पल लगता है कि काश कोई आकर यह कहता की एक्सीडेंट तो भयानक था पर प्रशांत सहित सभी लोग बच गये,लेकिन यह होगा नहीं,अब हमारे प्रशांत कभी लौटेंगें नही पर हम सभी को मिलकर उनके सपने को पूरा करना होगा,क्योंकि प्रशांत का जाना हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई संभव नही है,पर यह भी सच है की गरीब,दलित शोषित,पीड़ित,नवजवान के लिए जो सपना प्रशांत ने देखा उसे पूरा भी करना है,बस यही हम सबों की उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
 

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