Bindash News || बोलते रहे "नाथ", सुनते रहे "ठाकुर"
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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बोलते रहे "नाथ", सुनते रहे "ठाकुर"

Bindash News / 13-09-2018 / 1177


"पक्ष का सुना "भाषण",विपक्ष ने लगा कर "आसन"
 
आशुतोष रंजन
गढ़वा
 
"हर्षित हो रहा था एक मुखड़ा तो,एक चेहरा था मुरझाया हुआ,क्योंकि वाक़्या ही कुछ ऐसा आज नुमाया हुआ",जी हां वह कौन मुखड़ा था और किस कारण वह हर्षित था,साथ ही वह चेहरा कौन था जो उस वक्त था मुरझाया हुआ,उस वाक्ये को जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट-
 
सुनते रहे ठाकुर:- बोलते रहे नाथ,सुनते रहे ठाकुर,इस पंक्ति से तो आप कुछ समझे नहीं होंगें,तो आइए आपको विस्तार से बता दूं,दरअसल आज गढ़वा जिला के हासनदाग गांव में गणेश चतुर्थी के मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन ग्रामीणों द्वारा किया गया,जहां स्थानीय विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी को आमंत्रित किया गया,तय समय के अनुसार विधायक पहुंचे और कार्यक्रम की शुरुआत की,उधर अभी कार्यक्रम चल ही रहा था कि विपक्ष के मिथिलेश ठाकुर भी आ पहुंचते हैं,अब सत्तापक्ष के विधायक मंच पर थे तो उन्हें सामने दर्शक दीर्घा में बैठना पड़ा,और वहीं से बैठे बैठे उन्होंने सारा कार्यक्रम देखा और विधायक के भाषण को सुना,बस इसीलिए हमने कहा कि बोलते रहे नाथ और सुनते रहे ठाकुर।
 
विपक्ष ने लगा कर आसन:- इस साल को आगामी चुनाव की तैयारी वाली साल कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए,क्योंकि पक्ष से ले कर विपक्ष तक चुनाव की तैयारी में जुट चुका है,जिसे जहां मौका मिल रहा है वह अवसर को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा,अब किसी के हांथ मौका लग रहा है तो कोई उससे चूक जा रहा है,कुछ ऐसा ही मौका आज विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी के हांथ आया जब सामने रहे उनके चुनावी प्रतिद्वंदी और बोलने का अवसर केवल उनके पाले में रहा तो भला गेंद को गोल में डालने से विधायक कैसे चूकते,सो आज जहांतक हो सका विधायक ने वर्तमान प्रसंग पर बोलने के साथ उन सारी बातों को सुना डाला जिसे सुनाने का मौका हर पदधारी राजनेता को रहता है,एक तरफ बड़े ही हर्षित मन से विधायक बोलते रहे उधर सामने बैठ विपक्ष के नेता को सुनना पड़ा,इसीलिए यहां कहना पड़ा कि सत्तापक्ष का यानी विधायक का भाषण विपक्ष ने सुना लगा कर आसन।
 

 

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