Bindash News || ख़ौफ़ज़दा है माँ तो दहशत में है पत्नी
    

    
    

    
    

    
    
    






       
        
        
 


    

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ख़ौफ़ज़दा है माँ तो दहशत में है पत्नी

Bindash News / 30-04-2021 / 1228


क्या आम क्या ख़ास,हो रहा सबको अनजाने डर का अहसास


आशुतोष रंजन
गढ़वा

हलो..आप कहां हैं..इधर ही बाज़ार में हैं..जल्दी घर आइये..फ़िर हलो..कहां हो बाबू..बस स्टैंड तरफ़ हूं माँ..अरे उधर क्यों चले गए..सबकुछ जानते हुए भी तुम बाप बेटे को कुछ समझ नहीं आ रहा है..क्यों इतना परेशान हो मां,हम तो मास्क लगाए ही हैं,पापा को भी देखा था कि वो मास्क लगाए हुए थे,फ़िर मां कहती है..बेटा मैं कोरोना को ले कर परेशान नहीं बल्कि घट रही घटना को ले कर हलकान और चिंतित हूं,ना तो शहर में रहने लायक है और ना तो उस बस स्टैंड के इलाक़े में,आख़िर एक माँ ने ऐसा क्यों कहा आइये आपको इस ख़ास ख़बर के जरिये बताऊं।

हो रहा सबको अनजाने डर का अहसास:- देहरी से बाहर कौन कहे दहलीज़ के अंदर भी लोग ख़ौफ़ज़दा रहा करते थे,पर वह वक्त कालांतर का था,जब एक ओर गांव में नक्सली थे तो शहर अपराधियों से आक्रांत था,गांव और शहर दोनो जगह फ़ूलों की सुगंध से ज़्यादा बारूद की महक आती थी,पुलिसिया व्यवस्था भी माक़ूल नहीं था,थानों में सुनवाई नहीं होती थी,मज़बूरन लोगों को नक्सलियों के शरण में जाना पड़ता था,जिसका नतीज़ा हुआ कि नक्सली लोगों के हमदर्द बनते हुए आगे बढ़ते गए और फ़िर आगे चलकर सबके लिए दर्द बन गए,तो उधर शहर में भी अपराधियों के निशाने पर रहा,वो जब चाहे तब घटना को अंजाम देने लगे,क्या मोहल्ले की तंग गलियां और क्या मुख्य सड़क सभी खून से लाल होने लगे,पर बाद में चलकर पुरातनी पुलिसिया व्यवस्था जहां आधुनिक हुई वहीं उनके कार्यशैली में भी काफ़ी सुधार हुआ,जिसका सुपरिणाम हुआ कि गांव के लोगों का पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा और नक्सलियों के ऊपर से यक़ीन कम हुआ और आख़िरकार नक्सलियों के पांव उखड़े और गांव हद तक नक्सलियों से मुक्त हुआ तो इधर शहर में भी आपराधिक गिरोहों पर शिकंजा कसा और छोटे बड़े सभी अपराधियों के विरुद्ध  लगातार कार्रवाई हुई,आलम हुआ कि शहर भी लगभग आपराधिक घटनाओं से महफ़ूज हो गया,लोग ख़ुद को सुरक्षित मान अमन और सुकून का जीवन बसर करने लगे,लेकिन वही शहर यानी गढ़वा और यहां रहने वाले लोग एक बार फ़िर से कैसे ख़ौफ़ज़दा हो गए,क्यों वो ख़ुद को सुरक्षा से महरूम मानने लगे,आख़िर क्यों एक पत्नी को अपने पति और एक मां को अपने बेटे की चिंता सालने लगी.?,यह सवाल एक बार तब फ़िर से ज्वलंत हो गया जब कल दिन दुपहरी भींड़ भरे बस स्टैंड में अपराधियों ने तांडव मचाते हुए एक युवा व्यवसायी सह बस एजेंट की गोली मार कर हत्या कर दी,और बेख़ौफ़ हो चलते बने,उसी वक्त से शहर के लोगों के मन में एक अनजाना डर सा घर कर गया है,उन्हें यही चिंता खाये जा रही है कि क्या एक बार फ़िर से हमारा शहर अपराधियों के निशाने पर आ गया.?,क्या अब हम अपने आप को पूरी तरह हर बुरी बला से महफ़ूज समझ बाहर नहीं निकल सकेंगें,क्या अब हम जीवन जीने के लिए व्यवसाय नहीं कर पाएंगे,क्या जब तक कोई पति काम से और बेटा खेल कर घर वापस नहीं लौटेगा तब तक मां किसी अनहोनी की डर से दोहरी होती रहेगी,ऐसे कई यक्ष प्रश्न कल से सभी के जेहन में कौंध रहा है जिसका ज़वाब अनुत्तरित है।

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