साहस, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं भगवान परशुराम : मिथिलेश ठाकुर

साहस, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं भगवान परशुराम : मिथिलेश ठाकुर

गढ़वा में धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम की जयंती, पूर्व मंत्री मिथिलेश हुए शामिल



दिवंगत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती गढ़वा में काफी धूमधाम से मनाई गई। रविवार को बाबा खोनहरनाथ महादेव मंदिर में परिसर में आयोजित भगवान परशुराम जयंती समारोह में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश कुमार ठाकुर शामिल हुए। श्री ठाकुर ने भगवान परशुराम की प्रतिमा के समक्ष पूजा अर्चना कर गढ़वा व झारखंड सहित पूरे देश की सुख समृद्धि की कामना की। साथ ही इस मौके पर गढ़वा के बाबा खोण्हरणाथ मंदिर, चिनियां मोड़ पर आयोजित परशुराम जयंती एवं सदर अस्पताल ब्लड बैंक में आयोजित रक्तदान शिविर में श्री ठाकुर शामिल हुए।

मौके पर श्री ठाकुर ने कहा कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव के रूप में परशुराम जयंती मनाई जाती है। भगवान परशुराम साहस, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं। उन्हें चिरंजीवी माना जाता है। श्री ठाकुर ने कहा कि यह पर्व हमें अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने, धर्म के मार्ग पर चलने और निस्वार्थ भाव से सेवा करने की प्रेरणा देता है। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में परशुराम जी का जन्म हुआ था। वे साहस, ज्ञान और शक्ति के अनूठे संगम हैं। जिन्होंने शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुणता हासिल की थी। उनके जीवन की घटनाएं हमें सिखाती हैं कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना और धर्म का मार्ग अपनाना ही मनुष्य का सबसे बड़ा कर्तव्य है। यह पावन पर्व हमें अपने भीतर के डर को खत्म करने और सत्य के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा देता है। श्री ठाकुर ने कहा कि भगवान परशुराम का अवतार एक ऐसे समय में हुआ था, जब पृथ्वी पर अहंकारी और अत्याचारी राजाओं का आतंक बहुत अधिक बढ़ गया था। वे शासक अपनी शक्ति के मद में निर्दोष जनता और ऋषियों को बहुत प्रताड़ित करते थे। भगवान परशुराम ने न्याय के लिए शस्त्र उठाया। उन्होंने अपनी अटूट शक्ति से समाज को इन अत्याचारी राजाओं से मुक्त कराया और धर्म की पुनः स्थापना की। यह जयंती हमें याद दिलाती है कि शक्ति का असली उपयोग हमेशा कमजोरों की रक्षा और न्याय की व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही किया जाना चाहिए। मौके पर मुख्य रूप से रोशन पाठक, मनोज तिवारी, धीरज दुबे, आनंद प्रकाश दुबे, ज्योति धर दुबे, बबलू दुबे, धर्मेंद्र दुबे, कमल किशोर चौबे, किशोर ओझा, डीपी पांडे, लव पांडे, संजय पांडे, चिंटू पांडे, सुरेश पांडे, चेतन तिवारी, बबलू दुबे, पप्पू अरुण दुबे, छोटू पांडे, रवि रंजन शुक्ला, पारस पांडे, सुधाकर तिवारी, विकास तिवारी, टुनटुन दुबे, मयंक दुबे आदि लोग उपस्थित थे।

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