ड्रॉप्सी के कारण पांच लोगों की मौत, 2011 के बाद भारत में पहला मामला

ड्रॉप्सी के कारण पांच लोगों की मौत, 2011 के बाद भारत में पहला मामला

जानें क्या है लक्षण और बचाव के उपाय



सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : पलामू जिला के सिक्का गांव में एक परिवार के पांच सदस्यों की मौत के कारणों का पता चल गया है। झारखंड के पलामू जिले के एक छोटे से गांव में एक ही परिवार के सदस्यों की अचानक मौत से हड़कंप मचा हुआ है। परिवार के पांच सदस्यों की एक के बाद एक मौत हो गई। जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। जब लोगों की मौतें होनी शुरू हुईं तो आसपास के लोगों को शक हुआ कि कोई रहस्यमयी बीमारी लोगों की जान ले रही है। स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया और जो बात सामने आई वह और भी डराने वाली थी। मौत की वजह कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं, बल्कि ‘ड्रॉप्सी’ थी। जिसका कारण उनके खाने में इस्तेमाल होने वाला सरसो का तेल था।

यह पूरी घटना पलामू के पड़वा इलाके में स्थित सिक्का गांव में हुई। सिक्का के रहने वाले कुलदीप महतो की मौत 19 जून को हुई। ठीक अगले दिन उनकी बेटी बबिता कुमारी की मौत हो गई। इसके बाद, उनकी दूसरी बेटी इंदु कुमारी की 26 जून को, बहू श्वेता कुमारी की 28 जून को और बेटे नकुल महतो की 29 जून को मौत हो गई। वहीं कुलदीप महतो की पत्नी लाखो देवी, एक और बेटे और एक पोते को इलाज के लिए RIMS में भर्ती कराया गया। मौत के कारणों के बारे में बताया गया कि परिवार के लोगों का शरीर सूजने लगा था और बाद में उनकी मौत हो गई।

अंधविश्वास में परिवार खा रहा था राख

पांच मौतों के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं और लोगों को शक हुआ कि यह कोई रहस्यमयी बीमारी है। मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक टीम को लगाया गया। शुरुआती जांच से पता चला कि बीमार पड़ने के बाद कुलदीप महतो और उनके पूरे परिवार ने झाड़-फूंक का सहारा लिया था। कुलदीप महतो और उनकी बेटी बबिता कुमारी की मौत के बाद, पूरा परिवार झाड़-फूंक कराने के लिए लेस्लीगंज के पुरनाडीह इलाके में गया था। इस दौरान, वे काफी समय तक राख खाते रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीम सिक्का गांव और पुरनाडीह दोनों जगहों पर पहुंची और उस राख के नमूने लिए जिसका परिवार सेवन कर रहा था।

हालांकि, इससे कुछ खास पता नहीं चला। डॉक्टरों को शक हुआ कि यह स्थिति कोई रहस्यमयी बीमारी नहीं, बल्कि ड्रॉप्सी है। इसके बाद, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जांच के लिए मृतक परिवार के घर से खाने के सैंपल लिए। जब रिपोर्ट सामने आई तो डॉक्टरों का शक यकीन में बदल गया। रांची स्थित स्टेट फूड लेबोरेटरी ने सरसों के तेल में ‘आर्गेमोन’ के मिले होने की पुष्टि की। स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि कर दी है।

सरसों तेल में मिला था ऑर्गेमोन मैक्सिकाना

बताया गया कि परिवार जो सरसों का तेल इस्तेमाल कर रहा था, उसमें ऑर्गेमोन मैक्सिकाना (Argemone mexicana) पौधे का तेल मिला हुआ था। परिवार लगभग एक महीने से इस तेल का इस्तेमाल कर रहा था। जिसके कारण सबकी मौतें हुईं। पलामू के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सिक्का गांव में हुई पांच मौतें किसी रहस्यमयी बीमारी से नहीं, बल्कि एपिडेमिक ड्रॉप्सी से हुई थीं। कुलदीप मेहता का परिवार डेढ़ महीने से ऑर्गेमोन मिला हुआ सरसों का तेल इस्तेमाल कर रहा था।

स्वास्थ्य विभाग ने कुलदीप के घर से सरसों के तेल का सैंपल लिया था और रांची की स्टेट फूड लेबोरेटरी ने उसमें ऑर्गेमोन होने की पुष्टि की। रिपोर्ट के बाद, स्वास्थ्य विभाग ने परिवार और ग्रामीणों से पूछताछ की। जिससे पता चला कि परिवार ने डेढ़ महीने पहले पास के गांव की एक तेल मिल से सरसों का तेल निकलवाया था।

सिविल सर्जन ने बताया कि तेल मिल के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाने और इलाके के लोगों से स्वास्थ्य संबंधी डेटा इकट्ठा करने के लिए एक फूड सेफ्टी टीम को गांव भेजा गया है। अब तक, स्वास्थ्य विभाग ने सिक्का गांव में 195 घरों का सर्वे किया है और 1,378 लोगों के स्वास्थ्य संबधी पूछताछ की है। 56 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से किसी में भी बीमारी के लक्षण नहीं दिखे।

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