जंगल में हथियार छोड़ रहे ग्रामीण!

जंगल में हथियार छोड़ रहे ग्रामीण!

बूढ़ापहाड़ और पीटीआर के इलाके में बड़ा बदलाव

सात महीने में मिले 40 हथियार



दिवंगत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


डालटनगंज : झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व एवं बूढ़ा पहाड़ से सटे गांवों के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्रामीण खुद जंगल में हथियार छोड़कर जा रहे हैं और गोपनीय रूप से इनकी जानकारी प्रशासन को उपलब्ध करा रहे हैं।

सितंबर से अब तक 40 हथियार बरामद: वन विभाग के अधिकारियों को सितंबर से अब तक पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगभग 40 हथियार बरामद हुए हैं। ये सभी हथियार जंगल में छोड़े गए थे। सितंबर अक्टूबर 2025 में वन्य जीव सप्ताह के दौरान पलामू टाइगर रिजर्व प्रशासन ने ग्रामीणों से हथियार छोड़ने की अपील की थी। इस दौरान 23 ग्रामीणों ने अपने हथियार जमा किए थे। उसके बाद जंगल से लगभग 40 हथियार बरामद किए गए है।
प्रजेशकांत जेना का बयान

देसी हथियार, शिकार और सुरक्षा के लिए इस्तेमाल: ग्रामीणों ने घरों में देसी हथियार छिपाकर रखे थे। बरामद सभी हथियार स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए देशी हथियार हैं। इनका इस्तेमाल जंगली जानवरों के शिकार और खुद की सुरक्षा के लिए किया जा रहा था। प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ हथियारों का उपयोग नक्सल गतिविधियों में भी होता था। पिछले एक वर्ष के दौरान पलामू टाइगर रिजर्व में छापेमारी के दौरान 42 से अधिक हथियार बरामद किए गए हैं। जंगल से छोड़े गए और छापेमारी में बरामद सभी हथियारों को रिजर्व के गोदाम में रखा गया है। बरामद हथियारों का कनेक्शन छत्तीसगढ़ से जुड़ा है। ये सभी 12 बोर के हथियार हैं, जिनकी मारक क्षमता करीब 30 मीटर है। ऐसे हथियार मुख्य रूप से वन्य जीवों के शिकार में इस्तेमाल होते हैं।

पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में जन भागीदारी से कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और वन्य जीव की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया गया। पलामू टाइगर रिजर्व की तरफ से अपील भी जारी की गयी थी कि जिनके पास पुराने देसी या भरठुआ हथियार हैं वह सरेंडर कर दें। इसके रिजल्ट भी काफी अच्छे मिले हैं। 30 से 40 हथियार जंगल से मिले हैं। ग्रामीण जंगल में हथियारों को रख रहे हैं और गोपनीय रूप से इसकी जानकारी साझा कर रहे हैं। हथियारों को बरामद भी किया जा रहा है। यह अच्छी बात है कि लोग पारंपरिक शिकार को छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, जिनका स्वागत किया जा रहा है। वैसे लोग जो हथियार रखे हुए हैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है.- — प्रजेशकांत जेना, उपनिदेशक, पलामू टाइगर रिजर्व

पारंपरिक शिकार और सांस्कृतिक जुड़ाव: झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा के कई गांवों के ग्रामीण पारंपरिक शिकार के लिए लंबे समय से देशी हथियारों का इस्तेमाल करते रहे हैं। 70 के दशक तक पलामू इलाका वन्य जीव शिकार का बड़ा केंद्र रहा है। अंग्रेजी शासनकाल में यहां शिकार पर इनाम भी घोषित किए जाते थे। क्षेत्र में शिकार को लेकर सांस्कृतिक जुड़ाव भी रहा है। नक्सली हिंसा के दौरान कई ग्रामीणों ने हथियार छुपा लिए थे या नक्सलियों को सौंप दिए थे। नक्सलियों के कमजोर होने के बाद अब ग्रामीण हथियार छोड़ रहे हैं और गोपनीय रूप से प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं।

Tags

About Author

Ashutosh Ranjan

Follow Us On Social Media