युवाओं को नागपुरी और कुडुख में देनी होगी परीक्षा
आंदोलन का शंखनाद : जलाई गई अधिसूचना की प्रति
![]()
दिवंगत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : गढ़वा, पलामू, एवं लातेहार के इलाके में एक बार फिर से भाषा का विवाद शुरू हो गया है। झारखंड पात्रता परीक्षा के लिए पलामू और गढ़वा के लिए राज्य सरकार ने स्थानीय भाषा के रूप में नागपुरी और कुडुख (उरांव) का चयन किया है। 2025 में भी इन्हीं दोनों भाषाओं का चयन किया गया था। 2025 में बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ था और राज्य सरकार से स्थानीय भाषा के रूप में भोजपुरी, मगही और हिंदी जैसी भाषाओं का चयन करने का आग्रह किया गया था।
आज सरकार ने एक बार फिर झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट के लिए लोकल भाषाओं की लिस्ट जारी की है, जिसमें नागपुरी और कुडुख (उरांव) को पलामू, गढ़वा और लातेहार इलाकों के लिए पसंदीदा भाषा बताया गया है। भोजपुरी और मगही पलामू इलाके में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाएं हैं।
पलामू में नौ, गढ़वा में सात और लातेहार में 45 प्रतिशत आदिवासी
दरअसल 2011 की जनसंख्या के अनुसार पलामू की 19.36 लाख आबादी है। जिसमें मात्र 9.34 प्रतिशत की आदिवासी आबादी है। जबकि गढ़वा में सात प्रतिशत के करीब आदिवासी हैं। सिर्फ लातेहार में 45 प्रतिशत के करीब आदिवासी आबादी है। पलामू प्रमंडल की सीमा उत्तर प्रदेश एवं बिहार से सटी हुई है। भोजपुरी और मगही का सबसे अधिक यहां पर प्रभाव रहा है। पलामू प्रमंडल की एक स्थानीय भाषा है जिसे पलमुआ भाषा भी कहा जाता है। पलमुआ भाषा भी अधिसूचित है। 2023 में हुई जेटेट की परीक्षा में स्थानीय भाषा के रूप में भोजपुरी अधिसूचित थी।
राज्य सरकार पलामू, गढ़वा और वैसे इलाके जहां भोजपुरी अधिक बोली जाती है, उसके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। राज्य सरकार से वह मांग करते हैं कि पात्रता परीक्षा के लिए स्थानीय भाषा के रूप में भोजपुरी, मगही साथ ही साथ वैसी भाषा जो छूट गई है उसको शामिल करें। सरकार के इस फैसले के खिलाफ पलामू के लोग चुप नहीं बैठेंगे, आंदोलन करेंगे। यह आंदोलन सड़क से सदन तक होगा। राज्य सरकार पलामू के साथ लगातार सौतेला व्यवहार कर रही है, यहां से आंदोलन होगा ताकि यहां के युवाओं और लोगों को उनका अधिकार मिल सके – आलोक चौरसिया, विधायक, डालटनगंज
पलामू में शुरू हुआ आंदोलन, राजनितिक दल और छात्र संगठन हुए एकजुट
झारखंड में स्थानीय भाषा की घोषणा को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू हुआ है। भाजपा के साथ-साथ अन्य छात्र संगठन भी आंदोलन पर उतर गए हैं । भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के सदस्यों ने पलामू समाहरणालय गेट पर अधिसूचना की प्रति को जलाया और अपना विरोध जताया।
वहीं पलामू में छात्र संगठन एवं युवाओं को लेकर आवाज उठाने वाले संगठनों ने भी आंदोलन तेज कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के पलामू जिला अध्यक्ष अमित तिवारी ने कहा कि यह सिर्फ सांकेतिक रूप से आंदोलन है और अधिसूचना की प्रति को जलाया गया है। अगले चरण में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।
भाषा को लेकर लगातार हो रहे आंदोलन का नेतृत्व करने वाले राहुल दुबे ने बताया कि यह भोजपुरी और मगही के साथ सौतेला व्यवहार नहीं है बल्कि पलामूवासियों के साथ सौतेला व्यवहार है। पलामू चुप नहीं रहेगा आंदोलन करेगा। पिछली बार जेटेट की परीक्षा में भोजपुरी शामिल थी। लेकिन इस बार शामिल नहीं की गई है।







