जांच में हो रहे कई खुलासे, लाखों में बिकता है सैंड बोआ
पलामू टाइगर रिजर्व और वन विभाग की कार्रवाई में हुआ खुलासा
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दिवंगत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, वन विभाग और पलामू टाइगर रिजर्व की कार्रवाई में वन्य जीवों की तस्करी से जुड़े कई खुलासे हो रहे हैं। उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ से सैंड बोआ (दो मुहा सांप) की विदेशों में तस्करी हो रही है, जिसकी कीमत लाखों में है।
कुछ दिनों पहले पलामू के हरिहरगंज के इलाके से सांप का 12,00 एमएल जहर बरामद हुआ था। पूरे मामले में वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, वन विभाग और पलामू टाइगर रिजर्व ने सिलसिलेवार तरीके से कार्रवाई करते हुए अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उनके माध्यम से मिली जानकारी के आधार पर हुई कार्रवाई में रेड सैंड बोआ की तस्करी के मामले में जानकारी निकलकर सामने आई थी। जिसके बाद संयुक्त टीम ने रांची में छापेमारी करते हुए रेड सैंड बोआ बरामद कर लिया और कई लोगों को पकड़ा भी है।
रांची की महिला है मास्टरमाइंड, यूपी से लाया गया था दो मुंहा सांप
रेड सैंड बोआ की तस्करी की मास्टरमाइंड रांची की एक महिला है। जबकि इस नेटवर्क में एक पुलिस का जवान और आर्मी का एक रिटायर्ड जवान भी शामिल है। वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो एवं वन विभाग की टीम ने सभी को रडार पर लिया है। पूरे मामले में कार्रवाई की जा रही है।
रेड सैंड बोआ सांप रांची की महिला के पास से बरामद हुआ। पलामू टाइगर रिजर्व की टीम ने लातेहार के महुआडांड़ से दो तस्करों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार तस्करों ने ही दो मुंहे सांप के बारे में जानकारी दी। तस्करों ने बताया था कि सैंड बोआ यूपी से लाया गया था और करीब एक करोड़ की कीमत में इसे बेचा जाना था।
“वन्य जीवों की तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। कई इलाकों में अभियान जारी है। रेड सैंड बोवा की तस्करी के बारे में भी जानकारी मिली थी। जिसके बाद कारवाई हुई है। वन्य जीवों की तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा रहा है। पूरे मामले में छानबीन के बाद और अधिक जानकारी निकलकर सामने आएगी। सांप की साउथ ईस्ट एशिया में तस्करी हो रही थी।” – प्रजेशकान्त जेना, उपनिदेशक, पीटीआर
जहरीला नहीं होता है दो मुंहा सांप, गुड लक के लिए रखते हैं लोग
रेड सैंड बोआ को लेकर एक मिथक है कि इसके दोनों तरफ मुंह होते हैं और इसे घर मे रखने से गुड लक आता है। वन्य जीव विशेषज्ञ प्रोफेसर डीएस श्रीवास्तव बताते हैं कि रेड सैंड बोआ देखने में लगता है कि इसके दोनों तरफ मुंह है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है। यह सांप जहरीला नहीं होता है, लोग गुड लक के लिए इसे अपने घरों में रखते हैं। यह सांप अधिकतर रेतीले एवं शुष्क इलाकों में मिलता है। इसकी तस्करी प्रतिबंधित है। हालांकि, इंटरनेशनल मार्केट में इस सांप की कीमत करोड़ों में है।
बरामद किया गया सांप
1972 में रेड सैंड बोआ किया गया था संरक्षित, दवा के निर्माण में भी होता है इस्तेमाल
रेड सैंड बोआ को 1972 में संरक्षित किया गया था। इस सांप की इंटरनेशनल मार्केट में कीमत 25 करोड़ रुपये तक है। इसका इस्तेमाल गुड लक के अलावा दवा बनाने के लिए भी होता है। रेड सैंड बोआ का इस्तेमाल उत्तेजना बढ़ाने वाली दवाओं में किया जाता है। तस्करों का यह नेटवर्क नेपाल के माध्यम से साउथ ईस्ट एशिया तक सक्रिय है। नेटवर्क से जुड़े लोग स्थानीय स्तर पर सांप को खोजते हैं। फिर लोकल इंटर स्टेट नेटवर्क तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाती है। स्थानीय स्तर पर सांप पकड़ने वाले को 20 से 30 हजार रुपए दिए जाते हैं। बाद में बड़े शहरों में यह लाखों में बेची जाती है और इंटरनेशनल मार्केट में उसकी कीमत करोड़ों में हो जाती है। इस सांप की लंबाई करीब 75 सेंटीमीटर होती है, यह रात के समय अधिक नजर आता है।
2016 से 2023 के बीच सबसे अधिक तस्करी के आंकड़े किए गए रिकॉर्ड
वन विभाग की कार्रवाई और आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2023 के बीच पूरे देश में रेड सैंड बोआ की तस्करी से जुड़े हुए 177 के करीब घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। महाराष्ट्र बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड समेत कई इलाकों में तस्करी की घटनाओं को रिकॉर्ड किया गया है। नेपाल से सटे हुए जिलों में सबसे अधिक तस्करी के मामले पकड़े गए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों से यह नेपाल में भेजे जाते हैं।








