प्रकृति पर्व सरहुल के कार्यक्रमों में सदर एसडीएम ने लिया भाग

प्रकृति पर्व सरहुल के कार्यक्रमों में सदर एसडीएम ने लिया भाग

सरहुल प्रकृति, प्रगति और मानव जीवन के अटूट संबंधों का है उत्सव : एसडीएम

मानव और प्रकृति के संतुलित संबंधों से ही सतत विकास संभव


दिवंगत आशुतोष रंजन

 

प्रियरंजन सिन्हा 

बिंदास न्यूज, गढ़वा

 

गढ़वा : शनिवार को सरहुल महापर्व के पावन अवसर पर आदिवासी सरना विकास परिषद द्वारा आयोजित भव्य पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन में सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने सहभागिता करते हुए पाहन एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ पारंपरिक विधि-विधान से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

नगाड़ों और मांदर की थाप पर एसडीएम ने भी किया सरहुल नृत्य: कार्यक्रम के दौरान नगाड़ों एवं मांदर की गूंजती थाप ने पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी स्वयं भी पारंपरिक सरहुल नृत्य में शामिल हुए, जिससे उपस्थित लोगों में विशेष उत्साह देखा गया। उन्होंने कहा कि पर्व त्योहारों में इस प्रकार की घनिष्ठ सहभागिता के भाव से जनसमुदाय के साथ प्रशासनिक जुड़ाव बढ़ता है। इस दौरान उन्होंने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर आदिवासी समाज की परंपराओं के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया।

अपने संबोधन में अनुमंडल पदाधिकारी ने सरहुल पर्व की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व प्राकृतिक नववर्ष के रूप में मनाया जाता है, जो नए जीवन, नई ऊर्जा और सकारात्मक शुरुआत का संदेश देता है। उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश देता आया है और सरहुल उसी परंपरा का उत्सव है। आज के बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है।

प्रकृति संरक्षण और सतत विकास का दिया संदेश: अनुमंडल पदाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है। कार्यक्रम में गढ़वा एवं आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूरदराज के इलाकों, जैसे बड़गढ़, भंडरिया एवं छत्तीसगढ़ सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन हुआ।

कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह उत्सवमय रहा, जहां सामाजिक एकता, आपसी भाईचारा एवं सांस्कृतिक समरसता का सुंदर संगम देखने को मिला। अंत में अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने सभी को सरहुल महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में रचनात्मक ऊर्जा एवं सामूहिकता की भावना को और मजबूत बनाता है।

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Ashutosh Ranjan

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