गरिमा केंद्र : जहां महिलाएं खुल कर रखती हैं अपनी बात

गरिमा केंद्र : जहां महिलाएं खुल कर रखती हैं अपनी बात

गांव स्तर पर ही समस्याओं का हो रहा समाधान



दिवंगत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


डालटनगंज : एक ऐसी जगह जहां महिलाएं खुलकर अपनी बातों को रखती हैं और उनकी समस्याओं का समाधान भी होता है। उस जगह महिलाओं के हक एवं अधिकार की बात होती है। वहां महिलाओं के खिलाफ सामाजिक कुरीतियों से लड़ाई की भी बात होती है। यह जगह है गरिमा केंद्र।

गरिमा केंद्र (जेंडर रिसोर्स सेंटर) का गठन झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने किया है। गरिमा केंद्र का संचालन झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के माध्यम से किया जाता है। गरिमा केंद्र महिलाओं से जुड़े अपराध और शोषण से जुड़ी जानकारी पुलिस एवं अन्य तंत्रों के साथ भी साझा करता है। ग्रामीण इलाके में महिला एवं पुरुष गरिमा केंद्र में खुल कर अपनी बात और शिकायत रख रहे हैं।

पलामू में खोले गए हैं 12 गरिमा केंद्र

अबतक 400 से अधिक समस्याओं का हो चुका है समाधान

पलामू का इलाका नक्सल हिंसा, महिलाओं के प्रति समाजिक अपराध, अंधविश्वास में अपराध को लेकर चर्चित रहा है। पलामू के इलाके में प्रारंभिक दौर में 12 गरिमा केंद्र खोले गए। गरिमा केंद्र में अब तक 400 से अधिक समस्याओं का समाधान किया जा चुका है। पलामू के चियांकी में गरिमा केंद्र संकुल स्तरीय प्राथमिक स्वावलंबी सहकारी समिति के भवन में खोला गया है। मार्च 2025 से अब तक इस गरिमा केंद्र में 36 समस्याओं का समाधान हुआ है। जिनमें पुरुष से जुड़ी हुए कई समस्याएं भी हैं। इस गरिमा केंद्र में अगल-बगल के 10 पंचायत की महिलाएं पहुंचती हैं और अपनी बातों रखती हैं।

केस स्टडी 01

पलामू के सदर थाना क्षेत्र के जमुने पंचायत की एक महिला गरिमा केंद्र पहुंची और बताया कि बेटा और बहू उन्हें डायन कहकर बुलाते हैं। धीरे-धीरे पूरा गांव उन्हें डायन कहकर बुलाने लगा। गरिमा केंद्र ने बेटा-बहू, गांव के जन प्रतिनिधि एवं ग्रामीणों के साथ बैठक की एवं महिला को उसका सम्मान वापस दिलाया। बाद में गरिमा केंद्र के माध्यम से पीड़ित महिला को बकरी पालन से जोड़ा गया।

केस स्टडी 02

पलामू के सदर प्रखंड के चुकरु पंचायत की एक महिला ने गरिमा केंद्र की दीदी से शिकायत की कि उनके पति शराब के नशे में मारपीट कर रहे हैं और घर से बाहर निकाल दिया है।
गरिमा केंद्र ने रात में ही पहल करते हुए पूरे मामले में ग्रामीणों के साथ बैठक की और महिला की समस्या का समाधान किया।

केस स्टडी 03

पलामू के चियांकी के इलाके में एक नाबालिग की शादी हो रही थी। इस मामले की जानकारी गरिमा केंद्र के सदस्यों को मिली। गरिमा केंद्र में नाबालिग ने बताया कि वह पढ़ाई करना चाहती है। वह अभी शादी नहीं करना चाहती। गरिमा केंद्र ने नाबालिग के परिजनों के साथ बातचीत की। परिजनों ने लड़की की शादी नहीं की और उसकी पढ़ाई को फिर से शुरू करवा दिया।

कई बिंदुओं पर कार्य कर रहा गरिमा केंद्र

गरिमा केंद्र घरेलू हिंसा, यौन शोषण, बाल विवाह, अंधविश्वास समेत 09 अलग-अलग बिंदुओं पर कार्य कर रहा है। महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार से भी जोड़ने के लिए गरिमा केंद्र को पहल करना है। महिलाएं अपनी शिकायत को लेकर गरिमा केंद्र में पहुंचती हैं। जिसके बाद गरिमा केंद्र अपनी कार्रवाई शुरू करता है। जिन मामलों में कानूनी कार्रवाई की जरूरत होती है, उनकी जानकारी लोकल पुलिस स्टेशन और दूसरी एजेंसियों को दी जाती है। गरिमा केंद्र महिलाओं को थाना तक पहुंचने में भी मदद करता है।

गरिमा केंद्र कैसे करता है कार्य, कौन होते हैं इसके सदस्य

गरिमा केंद्र के संचालन की जिम्मेवारी झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी की है। गरिमा केंद्र में दो पारा लीगल वालंटियर और 5 से 7 इसके सदस्य होते हैं। गरिमा केंद्र में स्थानीय मुखिया एवं जनप्रतिनिधि की भी भूमिका होती है। इसमेंं शिकायत पहुंचने के बाद सबसे पहले रजिस्ट्रेशन किया जाता है। रजिस्ट्रेशन के बाद पूरे मामले को समझा जाता है। गांव स्तर पर बैठक की जाती है। मामले में कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भी सूचना दी जाती है। गरिमा केंद्र संबंधित पक्षों को बुलाती है और उनसे बातचीत करती है।

ग्रामीण इलाकों में अभी भी महिलाएं सामाजिक अपराध या हिंसा का शिकार होती हैं। गरिमा केंद्र एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां वह अपनी बातों को रख सकती हैं। स्थानीय स्तर पर ही उनकी समस्याओं का समाधान होता है। कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए संबंधित मामलों को थाना एवं डीएलएसए (District Legal Services Authority) के साथ साझा किया जाता है – अनिता केरकेट्टा, डीपीएम, जेएसएलपीएस

कई महिलाएं हिंसा के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाती हैं। इस तरह की महिलाओं को जागरूक किया जाता है एवं उनको गरिमा केंद्र से जोड़ा जाता है। महिलाओं की आवाज को उठाया जाता है। अधिकतर मामले घरेलू हिंसा और अंधविश्वास से जुड़े हुए पहुंचते हैं। पहले परामर्श दिया जाता है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाती है.- गुड़िया देवी, पीएलवी, गरिमा केंद्र

हिंसा बाल विवाह एवं बाल मजदूरी जैसे मामले भी उनके पास पहुंचते हैं। शिकायत आने के बाद समूह के माध्यम से बदलाव दीदी का भी चयन किया गया है। बदलाव दीदी के माध्यम से पूरे मामले को समझा जाता है और छानबीन भी करवाई जाती है। जरूरत पड़ने पर मुखिया से भी सहयोग लिया जाता है और मुखिया बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और सहयोग करते हैं – तारा देवी, सदस्य, गरिमा केंद्र

Tags

About Author

Ashutosh Ranjan

Follow Us On Social Media