महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल, पलामू के चेड़ाबार में महिलाएं लगाती हैं बाजार

महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल, पलामू के चेड़ाबार में महिलाएं लगाती हैं बाजार

सुरक्षा और बाकी सभी व्यवस्थाएं महिलाओं के हाथ में


सदास्मृत आशुतोष रंजन

 

प्रियरंजन सिन्हा 

बिंदास न्यूज, गढ़वा



गढ़वा : पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड का चेड़ाबार इलाका महिलाओं की एकजुटता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है। चेड़ाबार में महिलाओं के नेतृत्व में साप्ताहिक बाजार लगता है। जिसकी व्यवस्था, सुरक्षा और बाकी सभी काम महिलाएं ही देखती हैं। कभी पिछड़ेपन के लिए जाना जाने वाला यह इलाका अब महिलाओं की सांगठनिक सोच और आत्मनिर्भरता के लिए मशहूर है। महिलाओं की एक टीम ने चेड़ाबार में कोयल नदी के तटवर्ती क्षेत्र को बाजार के रूप में विकसित किया है। 

चेड़ाबार में आमतौर पर महिलाएं हर दिन बाजार लगाती हैं, लेकिन गुरुवार का दिन खास होता है। गुरुवार को भव्य साप्ताहिक बाजार लगता है। इस बाजार में सब्जियां, मिठाई और कपड़ों समेत कई तरह की चीजें बिकती हैं। यह बाजार पूरी तरह से ग्रामीण परिवेश का होता है, जिसमें गांव वालों की आम जरूरतों को पूरा करने वाला सामान बिकता है। इस बाजार में गांव और शहर दोनों तरह के लोग खरीददारी के लिए आते हैं। 

चेड़ाबार में महिलाएं लगाती हैं बाजार, अचानक बाजार लगाने का हुआ फैसला

चैनपुर के चेड़ाबार इलाके में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के तहत 22 स्वयं सहायता समूह हैं। इन समूहों से 250 महिलाएं जुड़ी हैं। 2022-23 में महिलाओं की एक मीटिंग चल रही थी। कुंती देवी नाम की एक महिला मीटिंग में आई हुई थी। कुंती देवी ने अपने खेत में टमाटर की बड़ी फसल उगाई थी। उन्हें टमाटर बेचने के लिए बाजार ले जाना था। 

चेड़ाबार बाजार: जैसे ही वह मीटिंग से उठकर जाने लगी, दूसरी महिलाओं ने उन्हें रोक दिया। जिसके बाद कुंती देवी ने अपनी समस्या महिला स्वयं सहायता समूह के सामने रखी। बाद में, महिलाओं को विचार आया कि क्यों ना शहर के बजाय अपने ही गांव में बाजार लगाई जाए। शुरुआत में, 50 महिलाओं ने मिलकर बाजार की शुरुआत की। 2026 तक, लगभग 300 महिलाएं बाजार से जुड़ गई हैं। 

“जब मीटिंग से निकल रही थी, तो मीटिंग के दूसरे सदस्यों ने मुझे टोका और जाने से रोका। मीटिंग के दौरान, मैंने महिला सदस्यों से कहा कि मैंने घर पर टमाटर उगाए हैं और उन्हें बाजार में बेचना है। महिलाओं ने मेरी बातें सुनीं और मीटिंग की जगह बाजार लगाने का फैसला किया गया। मजाक-मजाक में बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़ गईं और आज बाजार बड़े स्वरूप में है.” – कुंती देवी, महिला, चेड़ाबार

बाजार की हर व्यवस्था को संभालती हैं महिलाएं

चेड़ाबार में बाजार का हर इंतजाम महिलाएं संभालती हैं। वे बाजार पर निगरानी करती हैं और हर ग्राहक की सुविधा का ध्यान रखती हैं। क्योंकि बाजार में बड़ी संख्या में महिला कारोबारी शामिल होती हैं, इसलिए शराब पीने वालों पर विशेष निगरानी रखी जाती है और उनके ख़िलाफ कार्रवाई की जाती है। 

महिलाओं ने पांच लोगों की एक टीम बनाई है जो बाजार की व्यवस्था को संभालती है और निगरानी करती है। बाजार शुरू में छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे बड़ा बाजार बन गया। महिलाएं लाइन में बैठकर अपना सामान बेचने के लिए रखती हैं। 

“शुरुआती दौर में बहुत मेहनत करनी पड़ी। शुरू में बहुत कम ग्राहक आए, लेकिन सभी ने आस-पास के इलाके के लोगों को जोड़ने के पक्के इरादे से बाजार शुरू की थी। अब इसका फायदा दिख रहा है और बड़ी संख्या में लोग बाजार आ रहे हैं। महिलाएं खुद बाजार की निगरानी करती हैं। जब भी कुछ होता है, तो तुरंत कॉल करके उस स्थिति के बारे में बताया जाता है।” – सुनीता देवी, महिला दुकानदार

सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर है यह इलाका

चेड़ाबार का इलाका सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर है। किसानों और महिलाओं को अपनी सब्जियां बेचने के लिए 12 से 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। चेड़ाबार में पुल बनने के बाद यह सफर आठ से 10 किलोमीटर रह गया। हालांकि, ट्रांसपोर्ट की सुविधा आसान नहीं थी, और महिलाओं को अपनी सब्जियां बेचने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। 

महिलाओं ने लोन लिया और दीदी बाड़ी स्कीम के तहत खेती शुरू की। बाजार ने महिलाओं को काफी राहत दी है, और उनके उत्पाद को अब स्थानीय बाजार मिल रहा है। सब्जी उगाने वालों के अलावा, दूसरी महिलाओं को भी रोजगार के मौके मिले हैं। कुछ मिठाई और कपड़े बेच रही हैं और खुद का रोजगार कर रही हैं। 

“यह इलाका सब्जी उत्पादन के लिए मशहूर रहा है। महिलाएं दीदी बाड़ी योजना के तहत सब्जियां उगा रही थी। पास के शहर में सब्जियां बेचना एक चुनौती थी, अक्सर देर रात हो जाती थी। बाजार ने सभी महिलाओं को सुविधा दी है और उन्हें बाजार तक पहुंचने का रास्ता दिया है। वह खुद बाजार की निगरानी करती हैं ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।” – रीना देवी, महिलाओं की नेतृत्वकर्ता।

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