‘कॉफी विद एसडीएम’ में सरस्वतिया नदी संरक्षण को लेकर हुआ विस्तृत संवाद

‘कॉफी विद एसडीएम’ में सरस्वतिया नदी संरक्षण को लेकर हुआ विस्तृत संवाद

दो दर्जन से अधिक प्रबुद्ध नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं जागरूक लोगों ने लिया भाग

सरस्वतिया नदी गढ़वा वासियों की विरासत है, इसका संरक्षण सबकी जिम्मेदारी : एसडीएम



सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार के नियमित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के तहत बुधवार को अनुमंडल कार्यालय सभागार में सरस्वतिया नदी संरक्षण को लेकर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के दो दर्जन से अधिक प्रबुद्ध नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों एवं नदी स्वच्छता के प्रति जागरूक लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान सरस्वतिया नदी की वर्तमान स्थिति, नदी की स्वच्छता, अतिक्रमण मुक्ति, जनसहभागिता एवं दीर्घकालिक संरक्षण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने नदी संरक्षण को लेकर अपने सुझाव, अनुभव एवं फीडबैक साझा किए। कई लोगों ने नदी के किनारे बढ़ते अतिक्रमण, गंदगी एवं जागरूकता की कमी को गंभीर समस्या बताया।

“अभी अवसर है नदी बचाने का” : विनोद पाठक: पर्यावरण परिवार के अध्यक्ष एवं साहित्यकार विनोद पाठक ने कहा कि “आपन सरस्वतिया अभियान” को लगातार जारी रखना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि नदी को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर प्रत्येक हिस्से की जिम्मेदारी अलग-अलग टोलियों को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी नदी बचाने का अवसर है, बाद में चेतने से कुछ नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि नदी बचाने के लिए आस्तिक और नास्तिक दोनों प्रकार के लोगों को आगे आने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि नदी स्वच्छता में बेहतर कार्य करने वालों को प्रशासनिक स्तर से सम्मानित किया जाना चाहिए।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं सामूहिक श्रमदान की मांग: स्टूडेंट क्लब छठ पूजा समिति के विनोद जायसवाल ने कहा कि पहले सरस्वतिया नदी में भी कोयल नदी जैसी बालू हुआ करती थी। लेकिन अब उसमें काफी मात्रा में कीचड़ भर गया है। उन्होंने नदी किनारे छोटे-छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक रविवार को सामाजिक संस्थाएं सामूहिक श्रमदान के माध्यम से नदी स्वच्छता अभियान चलाएं।

जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर: नीरज श्रीधर स्वर्गीय ने कहा कि नदी संरक्षण में जनप्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षदों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मुखियाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

मांस-मछली के अवशेष फेंकने वालों पर कार्रवाई की मांग: समाजसेवी दयाशंकर गुप्ता ने कहा कि नदी के कई इलाकों में मांस एवं मछली के अवशेष फेंके जा रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को चिन्हित कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की।

वार्ड पार्षद ने लिया निगरानी का जिम्मा: नगर परिषद वार्ड संख्या 7 के पार्षद विनोद प्रसाद ने कहा कि वे शमीम टेलर के पास से लेकर जोड़ा पुल तक नदी क्षेत्र की निगरानी का जिम्मा लेते हैं तथा अपनी टीम के साथ मिलकर इसकी स्वच्छता सुनिश्चित करेंगे।

नदी किनारे पिलर गाड़ने एवं वृक्षारोपण का सुझाव: धीरेंद्र द्विवेदी ने नदी के किनारे सीमांकन हेतु पिलर गाड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि पिलर लगे रहेंगे तो लोगों को पता रहेगा कि यहां तक नदी की जमीन है। वहीं अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी ने कहा कि नदी के दोनों किनारों पर वृक्षारोपण कराया जाना चाहिए। साथ ही नगर परिषद को कचरा उठाव व्यवस्था भी बेहतर करनी चाहिए। क्योंकि जब कचरा उठाव अनियमित हो जाता है तो लोग इधर-उधर एवं नदी में कचरा फेंकने लगते हैं।

प्लास्टिक नियंत्रण एवं कचरा निस्तारण व्यवस्था पर भी चर्चा: युवा समाजसेवी चंदन जायसवाल ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषकों पर भी नियंत्रण लगाया जाना चाहिए। क्योंकि अधिकांश नदियां एवं जलस्रोत प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सुखबाना स्थित कचरा निस्तारण प्लांट को यथाशीघ्र चालू कराने की वकालत की।

उन्होंने तिलैया नदी में भी स्वच्छता अभियान चलाने का अनुरोध किया तथा कहा कि वे आज के स्वच्छता अभियान में प्रयुक्त डीजल का खर्च अपने स्तर से वहन करना चाहते हैं। इस पर उपस्थित लोगों ने उनका आभार व्यक्त किया।

अतिक्रमण हटाने एवं जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर: जगतारण तिवारी ने नदी किनारे अतिक्रमण हटाने एवं कचरा प्रबंधन को बेहतर करने का सुझाव दिया। वहीं प्रदीप पासवान ने लोगों के बीच व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।

“एसडीएम प्रेरक हो सकते हैं, काम समाज को करना होगा” : डॉ. टी. पीयूष: गढ़वा के चिकित्सक डॉ. टी. पीयूष ने कहा कि सरस्वतिया नदी को बचाने में गढ़वा एसडीएम केवल एक प्रेरक की भूमिका निभा सकते हैं। वास्तविक कार्य समाज को सामूहिक रूप से करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन अकेले इस अभियान को सफल नहीं बना सकता। उसमें सब लोग साथ दें। उन्होंने प्रभात फेरी के माध्यम से जागरूकता फैलाने, नदी किनारों पर आवश्यकता अनुसार जालियां लगाने तथा बुद्धिजीवियों की टोली बनाकर नदी स्वच्छता का माहौल तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि “चोर को चौकीदार बनाइए” अर्थात जो लोग सबसे अधिक गंदगी फैलाते हैं, उन्हीं व्यक्तियों को मोहल्ले में नदी स्वच्छता की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

कविता के माध्यम से व्यक्त हुई नदी की पीड़ा: धर्मनाथ झा ने नदी की गाद हटाकर सोलिंग कराने का सुझाव दिया। वहीं नितिन तिवारी ने मेराल क्षेत्र में भी सरस्वतिया नदी को लेकर स्वच्छता एवं अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाने का अनुरोध किया। इस अवसर पर नवोदित कवयित्री संध्या सुमन ने कविता के माध्यम से सरस्वतिया नदी की पीड़ा को व्यक्त किया।

“सरस्वतिया को पुनर्जीवित करने तक अभियान जारी रहेगा”: कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि सरस्वतिया नदी गढ़वा शहर की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर है तथा इसके संरक्षण के लिए प्रशासन एवं समाज दोनों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से नदी को अतिक्रमण मुक्त एवं स्वच्छ बनाए रखने में सक्रिय सहयोग की अपील की।

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