ऐसे स्थान पर बने सरकारी कार्यालयों के साथ घट चुकी हैं कई घटनाएं
वर्तमान भवन को तोड़कर वहीं पर लिफ्ट सहित मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाए जाने की मांग
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दिवंगत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : जिलांतर्गत कांडी प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर निर्जन स्थान पर नए प्रखंड सह अंचल कार्यालय भवन निर्माण के प्रस्ताव का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया है। कांडी प्रखंड तथा आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने इसे जनहित के खिलाफ बताते हुए नए उपायुक्त से मांग की है कि वर्तमान प्रखंड मुख्यालय परिसर में ही आधुनिक भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि आम जनता को सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान प्रखंड कार्यालय भवन जर्जर हो चुका है, जिसके कारण इसके पुनर्निर्माण का प्रस्ताव लंबित है। पहले जमीन नहीं मिलने का हवाला देकर प्रखंड कार्यालय को कांडी से करीब दस किलोमीटर दूर शिवपुर पंचायत के तेलिया निजामत गांव में बनाने की योजना बनाई गई थी। जब यह मामला सार्वजनिक हुआ तो पंचायत प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध किया था।
लोगों ने तत्कालीन उपायुक्त दिनेश कुमार यादव से मिलकर आग्रह किया था कि प्रखंड कार्यालय को मुख्यालय से दूर ले जाना जनता के लिए भारी परेशानी का कारण बनेगा। इसके बाद उपायुक्त ने अंचल अधिकारी को मुख्यालय के निकट जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया था। लेकिन अब जो नया प्रस्ताव सामने आया है, उसमें कार्यालय भवन मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर निर्जन क्षेत्र में बनाने की बात कही गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रखंड कार्यालय सुनसान इलाके में बनता है तो सबसे अधिक परेशानी गरीब और जरूरतमंद लोगों को होगी। कांडी पहुंचने के बाद भी लोगों को वहां तक जाने के लिए अतिरिक्त किराया देना पड़ेगा। एक तरफ का किराया लगभग 50 रुपये पड़ेगा, यानी आने-जाने में 100 रुपये तक खर्च हो जाएंगे। सरकारी कार्य एक दिन में पूरा नहीं होने की स्थिति में लोगों को कई बार चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ेगा।
कांडी पंचायत के पूर्व मुखिया विनोद प्रसाद, राजन गुप्ता, डॉक्टर दिल्केश्वर शाह, नंदू शाह, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, अजय प्रसाद गुप्ता, मालती देवी, चिंता देवी, सोमर देवी, शोभा देवी, अनंती कुमारी, सुदर्शन शाह, रंजीत गुप्ता, अजीत गुप्ता, मुंद्रिका चौधरी, शंकर रजवार, ददई शाह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि वर्तमान जर्जर भवन को तोड़कर तथा उसके बगल में स्थित गोदाम, जेएसएलपीएस कार्यालय और खाली जमीन को मिलाकर बहुमंजिला आधुनिक भवन बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ऊंची इमारत बनाई जाती है तो आम लोगों की सुविधा के लिए लिफ्ट की व्यवस्था भी की जा सकती है। इससे जमीन की कमी का बहाना भी समाप्त हो जाएगा और कार्यालय मुख्यालय में ही संचालित रहेगा। ग्रामीणों ने कहा कि कांडी प्रखंड में पहले से 13 पंचायत शामिल हैं। वहीं कुछ वर्ष पूर्व भवनाथपुर प्रखंड से अलग कर हरिहरपुर, मझिगावां और डूमरसोता पंचायत को भी कांडी में जोड़ा गया है। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्र में कार्यालय बनने से हजारों लोगों को परेशानी होगी। हरिहरपुर, मझिगावां और डूमरसोता के ग्रामीणों ने कहा कि पहले भवनाथपुर से कांडी आए, अब कांडी से और दूर जाने की नौबत क्यों लाई जा रही है।


सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि निर्जन स्थानों पर बने सरकारी कार्यालय कई बार अपराध और असामाजिक तत्वों के निशाने पर रहते हैं। सुनसान इलाके में स्थित कार्यालय में चोरी, तोड़फोड़ या अन्य घटनाओं की आशंका बनी रहती है। पलामू जिला के लेस्लीगंज प्रखंड का भवन शहर से तीन चार किलोमीटर दूर डबरा मोड़ पर बनाया गया था। वहां कई बार लूटपाट एवं ब्लास्ट जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। कांडी क्षेत्र भी पूर्व में कई उग्रवादी और आपराधिक घटनाओं का साक्षी रहा है, इसलिए जनहित के महत्वपूर्ण कार्यालय को सुरक्षित और आबादी वाले क्षेत्र में ही बनाया जाना चाहिए। पूर्व मुखिया विनोद प्रसाद ने कहा कि जिला, अनुमंडल और प्रमंडल मुख्यालय हमेशा शहरों व आबादी वाले क्षेत्रों में बनाए जाते हैं, ताकि जनता को सुविधा मिल सके। फिर प्रखंड मुख्यालय को लोगों से दूर निर्जन स्थान पर बसाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जनता की भावना का सम्मान करते हुए वर्तमान मुख्यालय परिसर में ही नए भवन निर्माण की मांग दुहराई है।







