पलामू में विदेशी मेहमानों का जमावड़ा

पलामू में विदेशी मेहमानों का जमावड़ा

कमलदह झील व अन्नराज डैम इन प्रवासी पक्षियों की पसंदीदा जगह

पलामू प्रमंडल में विदेशी प्रजाति के पक्षियों के आने से इलाके की बढ़ी रौनक



दिवंगत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


डालटनगंज : पलामू, गढ़वा व लातेहार के इलाके में हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंच गए हैं। प्रवासी पक्षियों ने हजारों किलो मीटर का सफर तय किया है और झील, तालाब एवं नदियों को अपना ठिकाना बनाया है। नवंबर महीने से प्रवासी पक्षियों का पलामू के इलाके में आना शुरू हो जाता है। यह पक्षी गर्मी की शुरुआत मार्च महीने तक रुकते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं।

कमलदह झील बनी प्रवासी पक्षियों की सबसे पसंदीदा जगह: पलामू गढ़वा एवं लातेहार के इलाके में वन विभाग के सर्वे के अनुसार 180 से अधिक विभिन्न प्रजाति के पक्षियों ने इस इलाके में अपना ठिकाना बनाया है। अधिकतर प्रवासी पक्षी साइबेरिया एवं रूस से जुड़े पक्षी है।

कौन कौन से विदेशी पक्षियों का हुआ आगमन? : पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के इलाके में विभिन्न प्रजाति के विदेशी पक्षियों का जमावड़ा है। यूरेशिया गौरैया, यूरोपीय देशों से सफर कर पलामू के इलाके में दाखिल हुई है। नॉर्दन पिनटेल, कॉमन टिल, स्लिंग डक, गडवाल, किंगफिशर, बैरे हेडेड गूज, साइबेरिया जैसी प्रजाति के पक्षी साइबेरिया से सफर कर पलामू गढ़वा एवं लातेहार के इलाके में अपना ठिकाना बनाते हैं। ठंड के दौरान यूरोपीय एवं तिब्बत के इलाके से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर लार्क जिन्हें स्थानीय स्तर पर बगेरी कहा जाता है, पलामू के इलाके में दाखिल होते हैं। हालांकि पलामू के इलाके में बगेरी का शिकार भी होता है। बगेरी धान के खेत में मिलते हैं।

कमलदह झील है प्रवासी पक्षियों का सबसे बड़ा ठिकाना: पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले बेतला नेशनल पार्क में मौजूद कमलदह झील, प्रवासी पक्षियों का सबसे बड़ा ठिकाना है। इसके अलावा सोन, कोयल, अमानत, अन्नराज डैम व मलय डैम में भी प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा है। कमलदह झील का ऐतिहासिक महत्व रहा है। झील का निर्माण चेरो राजवंश के दौरान हुआ था। उसी दौर से यह इलाका विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का सबसे बड़े जमावड़ा वाला इलाका है।

कई प्रकार के विदेशी पक्षियों का जमावड़ा है। पक्षियों को लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है एवं सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। पक्षियों की मूवमेंट पर निगरानी रखी जा रही है एवं पक्षियों के ट्रेल का भी आकलन किया जा रहा है। कमलदह झील में 12 से 15 प्रजाति के विभिन्न देशों से आए हुए पक्षी मौजूद हैं। पक्षियों की गणना भी की जा रही है। उसके अगल-बगल में मौजूद अन्य जल स्रोत में भी पक्षी मौजूद हैं : प्रजेशकान्त जेना, उपनिदेशक, पीटीआर

शिकार की वजह से घटी प्रवासी पक्षियों की संख्या: पिछले एक दशक में पलामू इलाके में दाखिल होने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या घटी है। मंगोलिया, तिब्बत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान आदि इलाकों से सफर तय कर पलामू प्रमंडल में दाखिल होने वाले पक्षी बार हेडेड गुड जो हंस जैसा होता है, इसका सबसे अधिक शिकार होता रहा है। इस पक्षी को स्थानीय भाषा में चकवा चकई भी कहा जाता है। ये पक्षी नदियों के किनारे को अपना ठिकाना बनाते हैं। यह एक शाकाहारी पक्षी है। इसे घास, अनाज, पत्ते आदि खाने में पंसद है। पलामू इलाके में दाखिल होने वाले प्रवासी पक्षियों में सबसे बड़ी संख्या उनकी ही होती थी, लेकिन एक दशक से इनकी संख्या लगातार घट रही है। कोयल नदी इनका सबसे बड़ा ठिकाना हुआ करता था। फिलहाल कुछ संख्या में यह कोयल नदी के किनारे नजर आते हैं।

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Ashutosh Ranjan

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