आरसीडी की तीन सड़कों के मुआवजा के लिए 12 साल से दफ्तरों का चक्कर लगाने पर भी निराशा ही मिली
इसी रवैया के कारण किसानों ने नहर का काम रोका तो प्रशासन खुदवाने लगा नहर
![]()
दिवंगत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : झारखंड राज्य का सीमावर्ती जिले गढ़वा का सीमावर्ती प्रखंड कांडी कई मामलों में अजूबा प्रखंड है। गढ़वा जिला के ही अन्य प्रखंडों में किसानों की रैयती जमीन पर सरकारी निर्माण का मुआवजा मिलता है। खास करके पथ निर्माण विभाग की योजना में निश्चित रूप से मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। बावजूद इसके कांडी प्रखंड में पथ निर्माण विभाग से तीन सड़कों का निर्माण कराया गया है। लेकिन आज तक इन सड़कों में ली गई जमीन के एवज में किसी भी किसान को मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया। यह सरकारी मजाक का एक जीता जागता नमूना है। जबकि जमीन गंवाए किसान लगातार 12 वर्षों से विभागीय व प्रशासनिक पदाधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक मुआवजा दिलाने के लिए लगातार चक्कर लगाते रहे हैं। लेकिन इनकी कोई नहीं सुनता।
किसानों की सहमति व मुआवजा भुगतान के बाद ही हो सकता है निर्माण :- विभागीय सूत्रों की मानें तो सड़क निर्माण की योजना पारित होते ही जिसकी जमीन से होकर सड़क का निर्माण किया जाना है उन किसानों के साथ बैठक करके उनकी राय ली जाती है। अगर इनमें से कोई किसान जमीन देने के लिए तैयार नहीं होता तो उसे स्थानीय जनता के बीच में विभागीय अधिकारियों के द्वारा समझा बुझाकर तैयार किया जाता है। इसके बाद जमीन की मापी करके मुआवजा के नए सरकारी प्रावधान के अनुसार सड़क में ली जाने वाली जमीन का बाजार दर से चार गुना और यदि मौके पर मकान बना हुआ है तो उसका बाजार दर से 8 गुना मुआवजा का भुगतान किए जाने का प्रावधान है। यदि खेत में फसल लगी है तो मिर्च का एक पौधा भी बिना मुआवजा के नष्ट नहीं किया जा सकता। उसकी कीमत अलग से दी जाती है। इतना ही नहीं मुआवजा का भुगतान हो जाने के बाद संबंधित किसान से लिखवा कर लिया जाता है कि अमुक खाता प्लॉट में (क्षेत्रफल देते हुए) इस जमीन का भुगतान मैंने प्राप्त कर लिया। अब सड़क निर्माण से मुझे कोई आपत्ति नहीं है। यह कागज सड़क निर्माण योजना के अभिलेख में लगाया जाता है। इसके बाद सड़क का निर्माण शुरू किया जाता है।
नहीं होता सरकारी प्रावधान का अनुपालन :- जबकि सच्चाई है कि यहां किसी भी किसान से सड़क निर्माण के पहले स्वीकृति तो दूर रहे उसे जानकारी तक नहीं दी गई कि आपकी जमीन में अमुक सड़क का निर्माण किया जाना है। संभवत: ऐसी स्थिति देश में किसी इलाके की नहीं होगी जहां जन सुविधा के नाम पर बिना मुआवजा दिए कीमती एवं उपजाऊ जमीन लेकर उस पर सरकारी निर्माण करा दिया जाता है। उसके एवज में एक पैसे भी बतौर मुआवजा नहीं दिया जाता। कांडी प्रखंड क्षेत्र में खरसोता मोड़ से कसनप, मझिआंव से सुंडीपुर एवं मझिआंव से भाया लमारी कांडी यह तीन सड़कें पथ निर्माण विभाग ने बनाई है। यह तो बात हुई पथ निर्माण विभाग के योजना के सड़कों की। जबकि ग्रामीण कार्य विभाग से पूरे कांडी प्रखंड क्षेत्र में कई दर्जन सड़कों का निर्माण कराया गया है। किसी सड़क में किसी को एक पैसे भी मुआवजा नहीं मिला। अन्य सरकारी योजनाओं को देखें तो विद्यालय भवन से लेकर पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, पुल पुलिया का बड़ी संख्या में निर्माण कराया गया है। लेकिन कहीं किसी निर्माण के एवज में रैयत को आज तक मुआवजा नहीं मिला। आज जब जिला मुख्यालय से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़क का निर्माण हो रहा है। इस सड़क में कई इलाकों में जब तक मुआवजा नहीं मिला किसानों ने किसी कीमत पर सड़क का निर्माण नहीं होने दिया। अंत में प्रशासन को उन्हें मुआवजा का भुगतान करना पड़ा। मुआवजा पाने का यही तरीका है। लेकिन कांडी प्रखंड क्षेत्र में सीधे एवं सरल स्वभाव के किसान निवास करते हैं। इसलिए उन्होंने सड़क निर्माण में व्यवधान नहीं डाला। वरना उन्हें जमीन चले जाने के बाद भी खाली हाथ नहीं रहना पड़ता। निर्माण नहीं रोक कर बड़ी गलती हुई थी। जिसका खामियाजा किसान आज तक भुगत रहे हैं। इस संबंध में किसानों ने सांसद एवं विधायकों से भी कई बार फरियाद की है। लेकिन इस दिशा में किसी ने ठोस प्रयास नहीं किया।
रोक दिया नहर का निर्माण :- इसी तरह के मामले में प्रखंड क्षेत्र के किसानों ने नहर का निर्माण रोकते हुए कोर्ट में वाद दाखिल कर दिया है। क्योंकि उन्हें नई भू अर्जन नीति के अनुसार ली जा रही जमीन व मकान का मुआवजा नहीं मिला।
क्या कहते हैं भू अर्जन पदाधिकारी :- इस संबंध में जिला भू अर्जन पदाधिकारी संजय कुमार प्रसाद ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा कि पथ निर्माण विभाग की इन तीनों सड़कों के लिए अभी तक उनके पास विभाग से अधियाचना ही नहीं आई है।
क्या कहा ईई ने :- इस संबंध में पथ निर्माण विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ई प्रदीप कुमार ने कहा कि सड़क निर्माण के समय रिक्यूजिशन गया होगा। लेकिन लौट कर आने पर हो सकता है फिर से नहीं गया हो। वैसे इस विषय में पता करते हैं।







