नक्सलियों के इलाके में कौन हैं बाघ दीदी!

नक्सलियों के इलाके में कौन हैं बाघ दीदी!

जंगल को बचाने के साथ ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ रही हैं बाघ दीदी


दिवंगत आशुतोष रंजन

 

प्रियरंजन सिन्हा

बिंदास न्यूज, गढ़वा

 

डालटनगंज : नक्सलियों के गढ़ खासकर बूढ़ापहाड़ जैसे इलाके में बाघ दीदी बदलाव ला रही हैं। पलामू लटाइगर रिजर्व ने 500 से अधिक बाघ दीदी को तैयार किया है. बाघ दीदी ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ रही हैं और इलाके में जंगल को बचा भी रही हैं। 

दरअसल, पलामू टाइगर रिजर्व ग्रामीणों के जंगल पर निर्भरता को कम करने के लिए कई अभियान चला रहा है। पलामू टाइगर रिजर्व की ओर से “हुनर से रोजगार अभियान” की शुरुआत 2024-25 में की गयी थी। इस अभियान का उद्देश्य पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत मौजूद गांव के ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें रोजगार के लिए संसाधन उपलब्ध करवाना है। पलामू टाइगर रिजर्व ने सबसे पहला सर्वे कराया था और सर्वे के बाद महिलाओं का एक चेन तैयार किया। अभियान में महिला और पुरुष दोनों को जोड़ा गया। लेकिन महिलाओं ने सबसे अधिक अपनी भागीदारी दिखाई है। अभियान से जुड़ने वाली महिलाओं को बाघ दीदी का नाम दिया गया। 

गाइड, अभियान की नोडल ऑफिसर और पीटीआर के उपनिदेशक प्रजेशकान्त जेना का बयान –

स्वरोजगार के लिए दीदियों को दी गई है ट्रेनिंग

पलामू टाइगर रिजर्व ने महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कई तरह की ट्रेनिंग भी दी है। इसके पीछे बड़ी वजह है कि इलाके की आदिवासी महिलाओं के साथ-साथ अन्य महिलाएं वन्यजीव के साथ-साथ जंगल को अच्छी तरह से जानती हैं। पलामू टाइगर रिजर्व ने अभियान चलाकर इलाके के महिलाओं को ब्यूटीशियन, कंपोस्ट खाद, गाइड, हॉस्पिटैलिटी, स्टिचिंग, ड्राइविंग समेत कई चीजों की ट्रेनिंग दिलवाई है। ट्रेनिंग का नतीजा है कि पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में रहने वाली 500 से अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ी हैं और बाघ दीदी बनी हैं। 

पलामू टाइगर रिजर्व में एक तरह से इनोवेशन है। स्थानीय महिलाएं कंजर्वेशन एंबेसडर की तरह कार्य कर रही हैं। पलामू टाइगर रिजर्व के वन्य जीव संरक्षण से जुड़ी कई योजनाओं में दीदियों को जोड़ा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास भी है। इस अभियान से एक डेवलपमेंट समिति से जुड़ी हुए महिलाएं भी जुड़ी हुईं हैं। सभी महिलाओं को बाघ दीदी बुलाया जाता है। बाघ दीदी काफी मजबूत हैं, जो जंगल को बचाने के साथ-साथ समाज में भी बदलाव की वाहक बनी हैं। महिलाओं का पर्यावरण एवं संरक्षण से काफी जुड़ाव भी है।” – प्रजेशकान्त जेना, उपनिदेशक, पीटीआर

जल, जंगल और जंगली जीवों को बचाने में निभा रहीं अहम भूमिका

बाघ दीदी पलामू टाइगर रिजर्व और नक्सल इलाके में जल, जंगल और जंगली जीव को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। लातेहार के बरवाडीह के बढ़नियां के रहने वाली मैरी सुरीन ने वन्य जीव के जल संरक्षण के लिए ग्रामीण तकनीक का सहारा लिया है और पानी को संरक्षित किया है। मैरी के इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री भी सम्मानित कर चुके हैं। इसी तरह पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में कई बाघ दीदी मौजूद हैं जो जंगली जीव को बचाने के साथ-साथ जंगल की भी रक्षा कर रही हैं। टाइगर रिजर्व का इलाका 1990 के बाद से नक्सल हिंसा की चपेट में रहा है। माओवादियों का सबसे बड़ा ट्रेनिंग सेंटर बूढ़ापहाड़ भी पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है। इस इलाके में बाघ दीदी मजबूती के साथ खड़ी हैं और जंगल को बचा रही हैं। साथ ही ग्रामीणों को मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। 

“पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में आदिवासी आबादी काफी है। यह इलाका नक्सल समस्या से भी जूझता रहा है। इलाके की महिलाएं मुख्यधारा से जुड़ी हैं और बाघ दीदी बनी हैं। इस इलाके से बाहर निकाल कर स्वरोजगार से जोड़ना महिलाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अभियान से जुड़ने वाली बाघ दीदी अपने-अपने इलाके में बदलाव के लिए कार्य कर रही हैं.” – नैनी मधु, अभियान नोडल, पीटीआर

बाघ दीदी बनने के बाद बेहद खुश हैं महिलाएं

बाघ दीदी बनने के बाद महिलाएं और लड़कियां बेहद खुश हैं। झारखंड में पलामू टाइगर रिजर्व पहले ऐसा इलाका है जहां टूरिस्ट गाइड महिलाएं हैं। नक्सली इलाके में रहने वाली लड़कियां ब्यूटीशियन बन रही हैं। साथ ही साथ पत्तों से कम्पोस्ट भी तैयार कर रही हैं। अभी हुनर से रोजगार अभियान के बाद नक्सली इलाके की लड़कियां कंप्यूटर चला रही हैं और गाड़ी चला रही हैं। साथ ही साथ अन्य लड़कियों को भी जोड़ रही हैं। 

हुनर से रोजगार अभियान के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करतीं महिलाएं 

टूटिस्ट गाइड सुनैना कुमारी भी बताती हैं कि हुनर से रोजगार अभियान काफी अच्छा है। इस अभियान से लड़कियों को कई जानकारी मिली है और इस अभियान से अन्य महिलाओं को वह जोड़ रही हैं। ग्रामीणों को वह बताती हैं कि वह रोजगार कर रही हैं और इससे फायदा भी हो रहा है। उन्हें देखकर अन्य महिलाएं भी जुड़ रही हैं। उन्हें अच्छा लगता है कि कोई उन्हें बाघ दीदी बुलाता है।

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Ashutosh Ranjan

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