झारखंड के इस इलाके में की गई बाघ देवता की स्थापना

झारखंड के इस इलाके में की गई बाघ देवता की स्थापना

बाघों के लिए काफी चर्चित रहा है यह क्षेत्र


दिवंगत आशुतोष रंजन

 

प्रियरंजन सिन्हा 

बिंदास न्यूज, गढ़वा

 

डालटनगंज : शनिवार को पूरा देश प्रकृति का पर्व सरहुल मना रहा था। इसी सरहुल पर्व के दौरान झारखंड में बाघ देवता की स्थापना की गई है। बाघ देवता की स्थापना के लिए 15 से अधिक गांवों के ग्रामीण एक जगह जमा हुए थे। दरअसल सरहुल प्रकृति से जुड़ा हुआ पर्व है और बाघ भी प्रकृति की रक्षा से जुड़ा हुआ है। झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के उत्तरी क्षेत्र के छिपादोहर के लात गांव में बाघ देवता की स्थापना की गई है। 

जंगल में आस्था के प्रतीक के रूप में उभरेंगे बाघ : डिप्टी डायरेक्टर: शनिवार को सरहुल के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बाघ देवता की स्थापना की गई और सैकड़ों ग्रामीणों ने पूजा शुरू की। पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेशकांत जेना ने कहा कि बाघ देवता जंगल में आस्था और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रतीक के रूप में उभरेंगे। 

बाघ के मूवमेंट के लिए चर्चित है यह क्षेत्र: दरअसल पलामू टाइगर रिजर्व के इलाके में जंगल एवं वन्य जीव के संरक्षण के लिए कई अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में पलामू टाइगर रिजर्व में रहने वाले ग्रामीणों को उनकी संस्कृति से भी जुड़ाव को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिस इलाके में बाघ देवता की स्थापना की गई है, वह इलाका बाघ के मूवमेंट के लिए चर्चित रहा है। 

पलामू का पीटीआर देश के नौ टाइगर रिजर्व में है शामिल: कुछ दिनों पहले ग्रामीणों ने आपसी सहमति से बाघ देवता की स्थापना का निर्णय लिया था। झारखंड का यह पहला इलाका होगा जहां बाघ को देवता मानकर पूजा की जाएगी। पलामू टाइगर रिजर्व करीब 1149 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और देश के नौ टाइगर रिजर्व में शामिल है। जहां सबसे पहले बाघों की संरक्षण की बात हुई थी। 

बाघ प्रकृति की रक्षा एवं जंगल के संरक्षण में सहायक: यह इलाका बाघों के मूवमेंट के लिए पूरे देश भर में चर्चित रहा है। पलामू टाइगर बाघ देवता की स्थापना को लेकर परब भागीदारी नामक अभियान की शुरूआत की गई थी। स्थानीय ग्रामीणों को बताया गया था कि बाघ प्रकृति की रक्षा एवं जंगल के संरक्षण में किस प्रकार सहायक है।

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Ashutosh Ranjan

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