लोक आस्था के महापर्व चैती छठ में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

लोक आस्था के महापर्व चैती छठ में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

सतबहिनी झरना तीर्थ में उमड़ा आस्था का सैलाब

समिति के लोगों ने की  घाटों की सफाई व भीड़ नियंत्रण किया



दिवंगत आशुतोष रंजन

 

प्रियरंजन सिन्हा

बिंदास न्यूज, गढ़वा

 

गढ़वा : लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के दूसरे दिन संध्या अर्घ्य के अवसर पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ एवं प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक पोखरा में बने टेंपल इन वाटर (सूर्य मंदिर) के समीप सैकड़ों व्रतियों ने कठिन तपस्या के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। व्रतियों ने मनोरम झरना एवं पवित्र जलाशयों में स्नान कर श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान भास्कर की उपासना की। सतबहिनी झरना तीर्थ में तीर्थ पुजारी पंडित आदित्य पाठक एवं पंडित प्रवीण पांडेय के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्रतियों को सूर्याभिमुख खड़े होकर दूध एवं जल से अर्घ्य दिलाया गया। “एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशि जगत्पते अनुकंप्य मां भक्त्यां गृहाणार्घ्य दिवाकर” मंत्र के उच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। अर्घ्य के बाद व्रतियों ने अपने अपने थाला पर बैठकर भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित पारंपरिक 5 – 5 गीत गाए।

इससे पूर्व व्रतियों ने सतबहिनी झरना तीर्थ स्थित नौ मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। घर लौटकर व्रतियों ने गुड़ की खीर एवं बिना चकला-बेलन की पूड़ी बनाकर खरना अनुष्ठान संपन्न किया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। चंद्रास्त से पूर्व व्रतियों ने चंद्र देव को भी अर्घ्य अर्पित किया, जिसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो गया। मौके पर मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के सदस्यों द्वारा छठ घाटों एवं आसपास के क्षेत्रों में कई दिनों से सफाई व्यवस्था की गई थी। कठिन तपस्या के कारण कार्तिक छठ की तुलना में संख्या कम रही, फिर भी सोन एवं कोयल नदी सहित विभिन्न जलाशयों पर सैकड़ों व्रतियों ने आस्था के साथ महाव्रत किया। बड़ा उपवास के दिन गुरुवार को सतबहिनी झरना तीर्थ में छठ व्रतियों की काफी भीड़ होगी। परिजनों व दर्शकों के साथ हजारों श्रद्धालु एकत्र होंगे। झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड की निबंधित इकाई मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के द्वारा लाईट, साउंड, टेंट व पेयजल की व्यवस्था की जाती है।

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Ashutosh Ranjan

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