एसडीएम के साथ कॉफी टेबल पर बैठे नर्सिंग कर्मी, हुआ संवाद
नर्स का पेशा मानव सेवा और संवेदना का प्रतीक : एसडीएम
एसडीएम ने नर्सिंग कर्मियों की सुनी समस्याएं, ईमानदारी से कार्य करने की सीख भी दी
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सदास्मृत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार के साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम “कॉफी विद एसडीएम” के तहत बुधवार को अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के उपलक्ष्य में संवाद कार्यक्रम का आयोजन अनुमंडल कार्यालय सभागार में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न अस्पतालों एवं संस्थानों से जुड़े 30 से अधिक नर्सिंग कर्मियों ने भाग लिया।
नर्सिंग कर्मियों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसडीएम ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे मानवीय और संवेदनशील चेहरा नर्सिंग कर्मी होते हैं। मरीजों की सेवा, देखभाल एवं आपात परिस्थितियों में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि इस संवाद का उद्देश्य नर्सिंग कर्मियों के अनुभवों, समस्याओं एवं सुझावों को सीधे सुनना तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में सार्थक पहल करना है।
कार्य परिस्थितियों एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर हुई चर्चा: संवाद के दौरान नर्सिंग कर्मियों ने ड्यूटी अवधि, कार्य के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों, अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता, मरीजों एवं परिजनों के साथ समन्वय जैसी विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने सरकारी अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं, साफ-सफाई, उपकरणों एवं सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर करने के सुझाव भी दिए।
महिला नर्सिंग कर्मियों ने रखीं अपनी बातें: कार्यक्रम में 90% से अधिक महिला नर्स पहुंची थीं। इन महिला नर्सिंग कर्मियों ने कार्य एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों के संतुलन, रात्रि ड्यूटी के दौरान सुरक्षा तथा कार्यस्थल से जुड़ी अन्य चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। इस दौरान उन्हें अपनी समस्याओं एवं सुझावों को खुलकर रखने का अवसर दिया गया।
सेवा-भावना पर निजी-लाभ को भारी न पड़ने दें: संजय कुमार ने बैठक में मौजूद सभी नर्सों से भावुक अपील की कि रोगियों की सेवा करना ईश्वरीय काम है। इसलिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा से इस सेवा अवसर का लाभ उठाएं। लेकिन कई बार उन्हें शिकायतें मिलती हैं कि सरकारी अस्पतालों की कुछ नर्स थोड़े से लालच में रोगियों को निजी अस्पताल जाने को प्रेरित करती हैं तो इससे उन्हें बड़ा दुख होता है। हालांकि उन्होंने कहा कि बहुत कम संख्या में ही इस प्रकार के कर्मी होंगे जो निजी लाभ देखते होंगे। ज्यादातर नर्सों का योगदान अति सराहनीय है।


सीनियर नर्सों ने जूनियर नर्सों को किया प्रेरित: इस संवाद कार्यक्रम के माध्यम से बैठक में पहुंची सीनियर नर्सों ने प्रशिक्षु नर्सों को मार्गदर्शन भी दिया। सदर अस्पताल की जनरल वार्ड की प्रभारी नर्स संध्या तिवारी ने कहा कि किसी रोगी के समक्ष जाने पर सदैव एक नर्स को हंसमुख रहना चाहिए और अच्छे से व्यवहार करना चाहिए। वहीं प्रसूति वार्ड की जीएनएम नीतू कुमारी ने कहा कि रोगियों को अस्पताल के अंदर अन्य विभागों तक पहुंचाने में मदद करना चाहिए। वहीं रंजू बाला मिंज ने जूनियर नर्स कर्मियों को समझाते हुए कहा कि कई बार ऐसे रोगी भी आते हैं जिनका कोई केयरटेकर नहीं होता है तो उन्हें इस बात का एहसास न होने दें कि उनके साथ बीमारी की हालत में भी कोई नहीं है। बल्कि उनके परिजन बनकर केयर करना चाहिए।
संवाद और समन्वय पर दिया गया जोर: एसडीएम ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सिविल प्रशासन एवं स्वास्थ्यकर्मियों के बीच नियमित संवाद आवश्यक है। उन्होंने सभी नर्सिंग कर्मियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नर्सिंग कर्मियों को अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस की शुभकामनाएं भी दी गईं।
सहभागिता: इस दौरान प्रीति कुमारी, चंदा भारती, श्वेता कुमारी, अंजू कुमारी, सोना कुमारी, सबीना खातून, सपना कुमारी, नेहा खातून, सुप्रिया कुमारी, शालिनी कुमारी, सपना पटेल, प्रिया कुमारी, निकिता प्रिया, शुभ्रा कुमारी, प्रियंका कुमारी, सीमांचली, अर्चना, स्नेहा, चांदनी, अरविंद कुमार, दीपक यादव, जमील अख्तर, रंजू बाला मिंज, नीतू कुमारी, संध्या तिवारी, रीना, पूनम आदि ने विचार व्यक्त किये।







