बूढ़ापहाड़ से हटेगा सीआरपीएफ बटालियन, पलामू रेंज में पुलिस पिकेट की हो रही समीक्षा

बूढ़ापहाड़ से हटेगा सीआरपीएफ बटालियन, पलामू रेंज में पुलिस पिकेट की हो रही समीक्षा

बूढ़ापहाड़ से सीआरपीएफ को हटाए जाने को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने गृह सचिव को लिखा पत्र



सदास्मृत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : माओवादियों के ट्रेनिंग सेंटर कहे जाने वाले बूढ़ापहाड़ से केंद्रीय रिजर्व बल (CRPF) को क्लोज करने की तैयारी चल रही है। जिसे लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखा है।

दरअसल, पलामू प्रमंडल के तहत आने वाले पलामू, गढ़वा और लातेहार जिले पूरे देश में नक्सल हिंसा के लिए चर्चित रहे हैं। पलामू को अप्रैल 2024 में नक्सल प्रभावित जिले की लिस्ट से अलग कर दिया गया। गढ़वा को भी शैडो एरिया में रखा गया है, जबकि लातेहार को नक्सल प्रभावित जिला की श्रेणी में रखा गया है।

साल 2000 से, केंद्रीय रिजर्व बल (CRPF) को पलामू, गढ़वा और लातेहार इलाकों में नक्सल विरोधी ऑपरेशन में तैनात किया गया है। 2016 तक, पलामू, गढ़वा और लातेहार इलाकों में CRPF की चार अस्थायी बटालियन तैनात थी। जबकि झारखंड की दूसरी बटालियनों की कंपनियां भी इलाके में तैनात थीं।

बूढापहाड़ से क्लोज होगा सीआरपीएफ बटालियन

2022-23 में, पलामू में तैनात 134 वीं CRPF बटालियन को सबसे पहले क्लोज किया गया। उसके बाद 112वीं CRPF बटालियन क्लोज हुई। अभी, 11वीं CRPF बटालियन लातेहार में तैनात है। जबकि 172वीं CRPF बटालियन गढ़वा में बूढ़ा पहाड़ इलाके में तैनात है।

बूढ़ा पहाड़ के दौरे के दौरान, ग्रामीणों ने बताया था कि CRPF को हटाने की तैयारी है। इस मामले में गृह सचिव को पत्र लिखा गया है, और CRPF IG से भी बात की गई है। कोशिश की जा रही है कि CRPF ज्यादा से ज्यादा समय तक वहीं रहे, लेकिन यह भारत सरकार का मामला है। भारत सरकार का गृह विभाग चाहे तो सीआरपीएफ को विड्रॉ कर सकती है। अगर केंद्र सरकार ऐसा करती है, तो झारखंड सरकार फुल स्ट्रेंथ से वहां जवानों की तैनाती करेगी।राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड सरकार

पलामू, गढ़वा और लातेहार में 60 से ज़्यादा हैं पुलिस कैंप और पिकेट:

2016 से 2022 के बीच पलामू, गढ़वा और लातेहार इलाकों में नक्सली कॉरिडोर में 60 से ज़्यादा पुलिस कैंप और पिकेट बनाए गए। 2023 में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के ट्रेनिंग सेंटर बूढ़ापहाड़ पर कब्जा कर लिया। इस दौरान ही CRPF को पलामू से क्लोज कर दिया गया था।

बाद में, 2024 में पलामू के कसमार, झाबर और डबरा में पुलिस पिकेट बंद कर दिए गए। हाल ही में पलामू के किशुनपुर ओपी को पिकेट में बदलने की बात सामने आयी थी। पलामू, गढ़वा और लातेहार में पुलिस पिकेट और कैंपों की समीक्षा की जा रही है। डीआईजी किशोर कौशल ने पुलिस पिकेट और कैंप के रिव्यू की पुष्टि की है।

पिकेट और कैंप के जरिए नक्सलियों के ख़िलाफ सफलता

पलामू, गढ़वा और लातेहार इलाकों में पिकेट और कैंप के जरिए नक्सलियों के खिलाफ़ कामयाबी मिली है। पहला पिकेट 2007-08 में बिहार में पलामू और गया के बॉर्डर पर माओवादियों के मांद चक में बनाया गया था। तब से माओवादियों के झारखंड-बिहार कॉरिडोर में धीरे-धीरे पुलिस पिकेट बनाना शुरू कर दिया गया। 2016-17 में कॉरिडोर पर कई पिकेट बनाए गए। जिससे बिहार के छकरबंधा और बूढ़ा पहाड़ में माओवादी ट्रेनिंग सेंटर के बीच कनेक्शन काफी कमजोर हो गया।

बाद में, 2018-19 में बूढ़ा पहाड़ के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस पिकेट और कैंप बनाए गए। इन पिकेट के जरिए पलामू और बूढ़ा पहाड़ इलाकों में नक्सल एक्टिविटी काफी कमज़ोर हुई है। जिसमें वे इलाके भी शामिल हैं जहां से CRPF को हटा लिया गया है। उन इलाकों में इंडिया रिजर्व बटालियन, झारखंड आर्म्स पुलिस और SAP के जवानों को तैनात किया गया है।

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