टावर झूला के साथ सज गईं अनेक दुकानें
कई राज्य व जिलों के लाखों लोग लेते हैं इस मेले में भाग
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दिवंगत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ में मकर संक्रांति के विराट मेले की तैयारी शुरू हो गई है। यह मेला यहां साल में लगने वाले पांच मेलों में से चौथ मेला है। इसमें स्थानीय के साथ-साथ सुदूर राज्यों तक के लाखों की संख्या में पर्यटक भाग लेते हैं। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ में मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाले तीन दिवसीय मेले के लिए तैयारी अंतिम चरण में है। कई जिलों के अलावे कई राज्यों के बड़े-बड़े व्यापारी सतबहिनी झरना तीर्थ स्थित झरना घाटी के पश्चिम मेला मैदान में पहुंच चुके हैं। जो अपने दुकान के लिए स्थान आवंटित कराकर दुकान सजाने लगे हैं। क्योंकि उनको तैयारी करने में भी दो-तीन दिनों का समय लगता है। मकर संक्रांति के मौके पर 14 जनवरी को लाखों की भीड़ करने पर व्यवस्था संबंधी कोई काम नहीं किया जा सकता। वर्तमान में मिठाई, श्रृंगार, होटल आदि की बड़ी-बड़ी दुकानें सजाई जा रही हैं। जबकि बच्चों व बड़ों का सबसे बड़ा आकर्षण टावर झूला भी खड़ा किया जा रहा है। उसकी व्यवस्था भी अंतिम चरण में है। टावर झूला के आलावे बच्चों एवं युवाओं के मनोरंजन के अनेक आइटम उसके पास मौजूद हैं। यह कंपनी तीन दिवसीय मकर संक्रांति मेले के साथ-साथ प्रति वर्ष होने वाले विराट मानस महायज्ञ में भी टावर झूला के साथ-साथ ड्रैगन ट्रेन, रॉकेट झूला, जंपिंग गेम सहित दर्जनों आइटम के खेल दिखाया करता है। इस मेला में स्थानीय 100 गांवों के साथ कई शहरो व झारखंड के कई जिलों एवं देश के कई राज्यों के लोग भाग लेते हैं। देश के उत्कृष्ट पर्यटन स्थलों में शुमार सतबहिनी झरना तीर्थ में लगने वाले पांच मेलों में से वर्ष का चौथा मेला सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में 14 जनवरी से शुरू होकर 16 जनवरी 2026 तक चलेगा। इस विराट मेले को लेकर हजारों की संख्या में सजने वाली दुकानों के लिए स्थानीय एवं बाहरी दुकानदारों के द्वारा स्थान सुरक्षित करा लिया गया है। सतबहिनी झरना तीर्थ के इस मेले की काफी दूर-दूर तक ख्याति है। इस कारण इस मेले में लाखों की संख्या में पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है। सतबहिनी झरना को शून्य से शिखर तक पहुंचाकर इसे सतबहिनी झरना तीर्थ बनाने वाली संस्था मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति मेले की सफल व्यवस्था के लिए हफ्तों से जुटी हुई है। मालूम हो कि यह मेला झरना घाटी से पश्चिम की ओर सुविस्तृत मेला मैदान में लगा करता है। भारी भीड़ होने पर इस मेला से बाहर के मैदान तक दुकानें सजती हैं। जिसमें लाखों की संख्या में लोगों को खरीदारी करते देखा जाता है। इस मेले में प्रसाद, फूल, फोटो, श्रृंगार, मिठाई, चाट नमकीन, होटल, वस्त्र, कास्ट निर्मित सामग्री, लौह निर्मित सामग्री, स्टूडियो, पान सहित सैकड़ो तरह के दुकान सजते हैं। जिन पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पर्यटकों को खरीदारी करते देखा जाता है। इधर सूर्य के उत्तरायण होने को हिंदू धर्म में बहुत बड़े त्यौहार की मान्यता दी गई है। इस कारण लोग 14 एवं 15 जनवरी को अहले सुबह सतबहिनी पहुंचकर मनोरम झरना में स्नान करते हुए यहां के नौ मंदिरों की श्रृंखला में पूजा करते एवं दान दक्षिणा करते देखे जाते हैं। इन मंदिरों में सतबहिनी भगवती माता महादुर्गा, महाकाली, महालक्ष्मी, 7 बहनों के भइया भैरवनाथ, भगवान भास्कर, बजरंग बली, साक्षी गणेश, भगवान शिव एवं नंदी महाराज के मंदिरों का नाम शामिल है। इसके साथ ही रहस्यमयी सात मंजिली साधना सह समाधि गुफा में भी सभी लोग दर्शन एवं पूजन करते हैं। जबकि सतबहिनी भगवती मंदिर के समक्ष झरना घाटी में बड़ी संख्या में लोग सत्यनारायण भगवान की कथा सुनते हैं। यद्यपि मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी की सुबह में है। क्योंकि 14 जनवरी के दोपहर 3:00 बजे के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। बावजूद इसके 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाने की परंपरा को निभाते हुए दर्शन पूजन के साथ मेला बाजार की शुरुआत 14 जनवरी को ही सब जगह हो जाती है। उपरोक्त जानकारी देते हुए समिति के सचिव पंडित मुरलीधर मिश्र ने कहा कि इस दिन मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के अध्यक्ष एवं विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नरेश प्रसाद सिंह की उपस्थित रहेंगे। जबकि समिति के सभी कोटि के सदस्य यथा विशिष्ट स्थायी सदस्य, स्थायी सदस्य एवं सामान्य सदस्यों के साथ तमाम श्रद्धालु आम जनों को भी आमंत्रित किया गया है। इस मौके पर 2 से 12 फरवरी 2026 तक आयोजित 26वें मानस महायज्ञ के सफल आयोजन को लेकर भी विचार विमर्श किया जाएगा।







