भारी सुरक्षा के बीच शुरू हुई कांडी के 3रे प्रमुख के लिए 5वीं चुनाव प्रक्रिया

भारी सुरक्षा के बीच शुरू हुई कांडी के 3रे प्रमुख के लिए 5वीं चुनाव प्रक्रिया

प्रखंड प्रांगण पुलिस छावनी में तब्दील

अशांति की सूचना के बाद डीसी के आदेश से निषेधाज्ञा लागू

चुनाव अधिकारी व कर्मियों के अलावा अन्य के 100 मी. से अंदर जाने पर सख्त पाबंदी


दिवंगत आशुतोष रंजन

 

प्रियरंजन सिन्हा

बिंदास न्यूज, गढ़वा

 

गढ़वा : जिला के कांडी प्रखंड के सियासी गलियारे में कई दिनों से ठंड में तपिश का प्रकोप है। पंचायतों के तीसरे आम चुनाव के बाद 3रे की जगह 5वें प्रमुख को चुनने की सरगर्मी हर घंटे बढ़ती रही है। सोमवार की सुबह के  9 बजते ही पंचायत की राजनीति का ‘महाकुंभ’ ब्लॉक व इसके बाहर नजर आने लगा। प्रखंड प्रमुख की कुर्सी पर कब्जे के लिए वोटिंग की प्रक्रिया – नोमिनेशन से शपथ तक आज ही होनी है। आज यह तय हो जाएगा कि पंचायती राज में प्रखंड की राजनीति का प्रमुख कौन होगा।

मैदान में डटे दिग्गज, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा: प्रखंड मुख्यालय में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल है। रंका एसडीओ के नेतृत्व में प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर मुस्तैद हैं। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए थाना प्रभारी असफाक आलम और राकेश सहाय समेत भारी पुलिस बल ने मोर्चा संभाल लिया है। उनके सहयोग के लिए रंका एसडीपीओ रोहित रंजन सिंह भी सदल बल मौजूद हैं। प्रखंड कार्यालय के अंदर निर्वाची पदाधिकारी एसडीएम संजय कुमार की अध्यक्षता में चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। वहीं बाहर समर्थकों की धड़कनें तेज हो रही हैं।

छावनी में तब्दील कार्यालय, 100 मीटर का दायरा सील: चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। रंका एसडीओ ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए घोषणा की है कि मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। 

गिव एंड टेक की चर्चा और रस्साकशी का खेल: बीते कई दिनों से चल रही जोड़-तोड़ की राजनीति और की खबरों के बीच, आज सभी पंचायत समिति सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। बंद कमरों में बनी रणनीतियां आज बैलट पेपर पर नुमायां होंगी। सूत्रों की मानें तो  मुकाबला बेहद कड़ा है।  एक एक वोट की कीमत सोने से महंगी है। 

दोपहर 2 बजे रहस्य से उठ जाएगा पर्दा: जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही हैं इंतजार की घड़ियां सिमटती जा रही हैं। अब बस यह देखना है कि  सत्ता की कमान किसी नए चेहरे के हाथ होगी या पुराने खिलाड़ी अपनी बिसात बिछाने में एक बार फिर कामयाब रहेंगे?

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Ashutosh Ranjan

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