एक सरकारी स्कूल जहां की छात्राओं को खाने व पानी पीने में भी करनी पड़ती है कटौती

एक सरकारी स्कूल जहां की छात्राओं को खाने व पानी पीने में भी करनी पड़ती है कटौती

क्योंकि उन्हें रोज 6 घंटे स्कूल में झेलना पड़ता है प्राकृतिक प्रेशर

इस स्कूल में 15 साल से नहीं है शौचालय


दिवंगत आशुतोष रंजन

 

प्रियरंजन सिन्हा 

बिंदास न्यूज, गढ़वा

 

गढ़वा : विद्यालय प्रबंधन, शिक्षा विभाग एवं सामान्य प्रशासन के होते हुए भी सैकड़ो छात्राओं को सप्ताह में 6 दिन व प्रतिदिन 6 घंटे मर्मान्तक  पीड़ा झेलनी पड़ रही है। इसका मतलब हुआ कि उनके दर्द और पीड़ा से किसी को कोई मतलब नहीं है। यह हालत है प्रखंड मुख्यालय कांडी स्थित जमा दो उच्च विद्यालय के मिडिल खंड की बच्चियों की क्योंकि इस विद्यालय में 15 साल से एक भी शौचालय नहीं है। यहां तो पीने का पानी भी वर्षों तक नहीं था। लेकिन विद्यालय की सहायिका के सौजन्य से निजी सबमर्सिबल स्कूल में लगा देने पर कुछ महीनों से पानी पीने की व्यवस्था हो गई है। इस विद्यालय में 1 से 8 तक वर्तमान में 638 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। जिन में छात्राओं की संख्या 300 से अधिक है। इनमें पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक की सयानी बच्चियां भी शामिल हैं। यह विद्यालय आबादी के बिल्कुल बीच में स्थित है। जहां लड़के तो कहीं जाकर निबट लेते हैं। लेकिन लड़कियां कहां जाएं। लघु शंका एवं शौच के प्राकृतिक प्रेशर को कोई कब तक झेल सकेगा यह प्रत्येक सहृदय व्यक्ति बखूबी समझ सकता है। लेकिन इसकी चिंता विद्यालय प्रबंधन को भी नहीं है। जो प्रतिदिन इस स्थिति से आंखों के सामने दो चार होते हैं। यह बात इसलिए कहनी पड़ रही है कि किसी मद से भले शौचालय नहीं बने लेकिन इस विद्यालय के खुद के विकास मद में 25 लाख से अधिक रुपए पड़े हुए हैं। डेवलपमेंट फंड की राशि को खर्च करने के लिए विद्यालय कार्यकारिणी समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित करना पड़ता है। जिसके अध्यक्ष विधायक होते हैं। विद्यालय का रजिस्टर साक्षी है कि तत्कालीन स्थानीय विधायक एवं झारखंड सरकार के मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी की अध्यक्षता में की गई बैठक के दौरान विकास मद की राशि से शौचालय निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई। वर्तमान में भी इस क्षेत्र के विधायक नरेश प्रसाद सिंह हैं। जिनकी अध्यक्षता में बैठक बुलाने, प्रस्ताव पारित कराने और शौचालय निर्माण कराए जाने की दर्जनों बार गुहार लगाई गई। लेकिन बच्चे बच्चियों के माता-पिता होते हुए भी सैकड़ों बच्चियों की इस नैसर्गिक जरूरत से किसी को कोई मतलब नहीं है। इतना ही नहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक के साथ-साथ पलामू के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक के कांडी आने पर इस बात की गुहार लगाई गई है। गुहार लगाने वालों में शिक्षकों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे हैं। बावजूद इसके इस कार्य की ओर किसी ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। यह तो हुई विभाग और सामान्य प्रशासन की बात। अब बात करें चुनाव विभाग की। इस विद्यालय में प्रत्येक चुनाव में चाहे वह पंचायत का चुनाव हो, विधानसभा का चुनाव हो या लोकसभा का चुनाव – यहां मतदान केंद्र रहता ही है। प्रत्येक मतदान केंद्र में सभी तरह की व्यवस्था बिल्कुल सुदृढ़ किए जाने का स्थानीय प्रशासन ही नहीं चुनाव आयोग के द्वारा भी निर्देश दिया जाता है। लेकिन आलोच्य अवधि में सात चुनाव हो चुके हैं। बावजूद इसके बिना शौचालय और बिना पानी के मतदान कर्मियों को भी इस बूथ में समय गुजारना पड़ा। प्रखंड मुख्यालय की यह गंभीर समस्या मीडिया की भी हमेशा सुर्खियां बनती रही है। बावजूद इसके किसी ने इस ओर नजर करने और तदनुसार कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। नाम नहीं छापने की शर्त पर दर्जनों की संख्या में छात्राओं ने कहा कि लड़के तो कहीं इधर-उधर चले जाते हैं। स्थानीय बच्चियां अपने घर चली जाती हैं। लेकिन जो दूर से पढ़ने आते हैं हम लोग कहां जाएं। इस पीड़ा के कारण हम लोग खाने एवं पानी पीने में भी परहेज करते हैं। क्योंकि 6 घंटा इसी हालत में व्यतीत करना पड़ता है। कुछ ने तो कहा कि कई पूर्व छात्राओं को विद्यालय से बीमारी की सौगात लेकर जाना पड़ा है। बावजूद इसके किसी को इसकी चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी दौर गुजरा है कि स्कूल की हेड मास्टर भी महिला और जिला की जिला शिक्षा पदाधिकारी भी महिला थीं। इस स्कूल में आने पर दोनों के सामने यह पीड़ा बताई गई थी। लेकिन महिला होते हुए भी उन लोगों ने छात्राओं की पीड़ा पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। 

क्या कहते हैं डीएसई :- इस संबंध में बात करने पर जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने दैनिक भास्कर से कहा कि इस स्थिति की उनको जानकारी है। बावजूद इसके अभी तक यह काम क्यों नहीं हुआ इसका पता करके वे शीघ्र ही शौचालय निर्माण की पहल करते हैं। चाहे जहां से भी होगा उक्त विद्यालय में शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

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Ashutosh Ranjan

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