+2 व उवि में हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, केमिस्ट्री, पीटी व म्यूजिक टीचर नहीं
वहीं कक्षा 6 से 8 में एक भी शिक्षक नहीं, बच्चों का भविष्य अंधकार में
यहां से भेज तो दिए गए 14 शिक्षक लेकिन आए मात्र एक
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दिवंगत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : जिलांतर्गत कांडी प्रखंड के अपग्रेड +2 उवि कांडी की स्थिति इतनी विकट है कि यहां से 14 शिक्षक चले तो गए। लेकिन उनकी जगह पर आज तक कोई नहीं आया। जिसका खामियाजा यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। राजकीय कृत जमा दो उच्च विद्यालय कांडी के जमा दो खंड में हिंदी, गणित, रसायन विज्ञान एवं अंग्रेजी का कोई शिक्षक नहीं है। इसी तरह से हाई स्कूल खंड में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, संगीत एवं शारीरिक शिक्षा का कोई शिक्षक नहीं है। यह तो ऊपर की बात हो गई। नीचे नजर डालें तो मिडिल सेक्शन में कक्षा 6 से 8 के बच्चों के लिए एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। जबकि एक से पांच तक के प्राइमरी क्लास के लिए एक सरकारी एवं छह सहायक अध्यापक उपलब्ध हैं। इन आंकड़ों की नजर से देखने पर कोई भी समझ सकता है कि इस विद्यालय में अनिवार्य विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं तो यहां के छात्र छात्राओं को कैसी शिक्षा दी जा रही है। और विडंबना तो यह है कि यह राम कहानी शिक्षा विभाग को मालूम है। क्योंकि अगस्त 2024 में एक बहुत बड़े षड्यंत्र के तहत विद्यालय की तत्कालीन प्रधानाध्यापिका विद्यानी बाखला को रिश्वतखोरी के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के द्वारा गिरफ्तार करा दिया गया था। इस बड़ी घटना के प्रकाश में आते ही इसके पीछे के रहस्य का उद्घाटन हो गया। जिसका नतीजा था कि जिन शिक्षकों के द्वारा रचना रची गई थी उनके विरोध में यहां का अवाम खड़ा हो गया। इस मामले को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ अभिभावक वर्ग जिला के प्रशासनिक प्रमुख से लेकर विभागीय प्रमुख तक गुहार लगाया। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विषय की गंभीरता को समझते हुए मौके पर आकर इंक्वायरी की।
नहीं हैं कम्पलसरी विषयों के एक भी शिक्षक :- जनता की शिकायत सही पाए जाने के बाद उन्होंने तीन शिक्षकों अरविंद कुमार पीजीटी गणित, शमी अहमद पीजीटी बायोलॉजी एवं दिनेश कुमार यादव पीजीटी हिंदी को अन्यत्र प्रतिनियोजित कर दिया। जबकि एक शिक्षिका सरिता देवी अवकाश पर हैं। वहीं रसायन शास्त्र की शिक्षिका मधुलता डेपुटेशन में गढ़वा में हैं। पिछले महीने विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक के द्वारा एक शिक्षक की मनमानी एवं स्वेच्छाचारिता का आरोप लगाते हुए विभाग को सूचित किया गया। नतीजा हुआ कि विद्यासागर विश्वास टीजीटी गणित एवं प्रदीप कुमार टीजीटी अंग्रेजी को भंडरिया प्रखंड के दो विद्यालयों में प्रतिनियोजित कर दिया गया।
एक पीजीटी बायोलॉजी शिक्षक का बतौर प्रभारी अभी प्रतिनियोजन किया गया है। इसके साथ ही सितंबर 2025 में 6 सहायक अध्यापकों की बहाली सहायक आचार्य के रूप में हो गई। वे भी यहां से चले गए। लेकिन जाने वाले शिक्षकों की जगह पर किसी भी शिक्षक का कांडी जमा दो हाईस्कूल में पदस्थापन नहीं किया गया। ऐसी हालत में अनिवार्य विषयों की पढ़ाई की दशा एवं छात्रों के भविष्य की दिशा के विषय में अच्छी तरह से समझा जा सकता है।
2300 विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में :- अब छात्रों की संख्या पर नजर डालें तो प्लस टू खंड में 1088 विद्यार्थी हैं। वहीं हाई स्कूल खंड में 500 विद्यार्थी हैं। जबकि मिडिल सेक्शन के वर्ग 1 से 8 तक में 600 विद्यार्थी हैं। गौरतलब है कि 11वीं, नवीं, छठी एवं पहली कक्षा में नामांकन किया जा रहा है। छात्र संख्या अभी और बढ़ने वाली है। ऐसी स्थिति परिस्थिति में इस विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य का अंदाजा लगाया जा सकता है। कहां तक बताएं इस विद्यालय के 2300 विद्यार्थियों को मात्र 21 कमरों में पढ़ाया जाता है। स्थिति इतनी उपेक्षा की शिकार हो चुकी है कि 18 साल पहले प्लस टू हाई स्कूल में अपग्रेड हुए इस विद्यालय में उत्क्रमण के फल स्वरुप आज तक भवन का निर्माण नहीं हो सका है। जबकि इस विद्यालय की जमीन पर बाहर के लोग लगातार अतिक्रमण कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति 2020 की बात करें तो 2300 विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए 77 शिक्षकों और 77 कमरों वाले भवन की ही जरूरत है। लेकिन इस ओर से विभाग सर्वथा उदासीन बना हुआ है।
विभागीय उपेक्षा का प्रमाण :- विभागीय उपेक्षा का प्रमाण चाहें तो चार-पांच साल पहले अपग्रेड हुए उत्क्रमित शाही देव जमा दो उच्च विद्यालय खरौंधा में प्लस टू खंड के भवन का निर्माण पूरा हो गया। यह कांडी जमा 2 उच्च विद्यालय की उपेक्षा का सबसे ज्वलंत उदाहरण है। जहां बच्चों की संख्या कम है वहां भवन का नवनिर्माण पूरा हो गया। जहां के बच्चे दशकों से भवन का अभाव झेल रहे हैं वहां उत्क्रमण के फल स्वरुप भी भवन का निर्माण नहीं हुआ।
क्या कहा डीईओ ने :- इस विषय में जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा ने कहा कि जिनका प्रशासनिक दृष्टिकोण से डेपुटेशन नहीं हुआ है। वैसे शिक्षकों को शीघ्र ही वापस किया जा रहा है। अनिवार्य विषयों के एक भी शिक्षक नहीं हैं कहने पर कहा कि एक शिक्षक को भेजा हूं और एक दो शिक्षक देखता हूं।








