गीत, ग़ज़लों और कविताओं के साथ हुआ नववर्ष का स्वागत
नये साल में जिले में साहित्यिक गतिविधियों को दी जाएगी ऊंचाई : एसडीएम
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दिवंगत आशुतोष रंजन
प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा
गढ़वा : गुरुवार को नववर्ष के अवसर पर अनुमंडल कार्यालय सभागार में भव्य काव्यगोष्ठी साहित्यिक उल्लास और सांस्कृतिक ऊर्जा के साथ आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने की। आयोजन का संयोजन वरिष्ठ साहित्यप्रेमी नीरज श्रीधर ने किया। जबकि मंच संचालन कवि राकेश त्रिपाठी एडवोकेट ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ लवाही कला के अखिलेश पांडेय द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात श्रवण शुक्ला ने ‘सूर्य का विवाह’ कविता प्रस्तुत की। युवा कवि इंद्र कुमार देव कुमार ने ‘नए सपने, नई खुशियाँ’ के माध्यम से आशावाद का संदेश दिया। जय पूर्णा ने लक्ष्य प्राप्ति में धैर्य के महत्व को रेखांकित किया। वहीं डाक्टर टी. पीयूष ने ‘स्वप्न ऊँचाइयों का’ कविता से श्रोताओं को प्रेरित किया।
योगेंद्र सिंह सेवानिवृत्त शिक्षक ने वीर कुंवर सिंह की जाँबाज़ी पर आधारित ओजपूर्ण कविता सुनाई। सौरभ तिवारी ने ‘बदलाव का आह्वान’ कविता के माध्यम से सामाजिक चेतना का संदेश दिया। युवा कवयित्री संध्या सुमन ने अपनी मधुर कंठ-स्वरित प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिक्षक धर्मेंद्र कुमार ने बालू चोरी पर व्यंग्यात्मक कविता प्रस्तुत की। जबकि परशुराम ने अस्पताल व्यवस्था पर आधारित कविता के माध्यम से कटाक्ष किया। अरविंद तिवारी ने दहेज प्रथा पर मार्मिक पीड़ा को शब्द दिए। इसके अलावा अद्भुत प्रभात ने ‘ओस की बूंद’, नीरज मालाकार ने ‘जमाने का दर्द’ विजय हिंद ने हेलमेट पर जागरूकता परक रचना व राजमणि राज ने ‘बदलेगा महज कैलेंडर’ जैसी प्रस्तुतियां दीं। इनके अलावा राकेश त्रिपाठी, दिनेश कुमार आदि ने भी अपनी रचनाएं पेश की। एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि गढ़वा में साहित्य-संरक्षण की दिशा में गंभीरता से कार्य किया जाएगा। फलस्वरूप 2026 गढ़वा में साहित्य और संस्कृति के उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण साल साबित होगा।
काव्यगोष्ठी की विशेषता यह रही कि इसमें 30 से अधिक कवि एवं रचनाकारों ने सहभागिता की। शिक्षकों, चिकित्सकों, पुलिसकर्मियों, अधिवक्ताओं, रंगमंच से जुड़े कलाकारों सहित शहर के विभिन्न बौद्धिक वर्गों की सक्रिय भागीदारी रही। युवा कवियों से लेकर वरिष्ठ कवियों तथा महिला रचनाकारों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक समावेशी एवं गरिमामय बना दिया।
तालियों की गड़गड़ाहट और साहित्यिक उत्साह के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। जिससे नववर्ष का स्वागत एक सकारात्मक, रचनात्मक और सांस्कृतिक वातावरण में संपन्न हुआ।








