“कॉफी विद एसडीएम’’ : आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं से सार्थक संवाद

“कॉफी विद एसडीएम’’ : आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं से सार्थक संवाद

जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, आजीविका, नशा मुक्ति और परंपरा संरक्षण पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक में उरांव, कोरवा, परहिया, बैगा, चेरो खरवार आदि समूहों के प्रतिनिधि हुए शामिल



दिवंगत आशुतोष रंजन

प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : सदर एसडीएम संजय कुमार के नियमित साप्ताहिक संवाद कार्यक्रम ‘कॉफी विद एसडीएम’ के अंतर्गत आज अनुमंडल क्षेत्र के आदिवासी समाज के सामाजिक नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ संवाद आयोजित किया गया। बैठक में गढ़वा, मेराल, मझिआंव, डंडई, रंका आदि क्षेत्रों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने-अपने समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार एवं सुझाव साझा किए। संवाद कार्यक्रम में अनुमंडल स्तरीय वनाधिकार समिति के दो जनजातीय सदस्य भी शामिल हुए।

जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर जोर: संवाद के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने जल, जंगल और जमीन से जुड़े पारंपरिक अधिकारों, वनाधिकार पट्टा, लघु वनोपज के उचित मूल्य तथा स्थानीय आजीविका के सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इन क्षेत्रों में बेहतर क्रियान्वयन और प्रशासनिक सहयोग की आवश्यकता जताई।

शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य पर चर्चा: बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति, विद्यालयों में उपस्थिति, ड्रॉपआउट की समस्या, युवाओं के लिए कौशल विकास एवं रोजगार के अवसरों पर चर्चा की गई। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, कुपोषण जैसी समस्याओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

नशा और अंधविश्वास के विरुद्ध अभियान चलाने का किया अनुरोध: लगभग सभी क्षेत्रों से पहुंचे आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एसडीएम से अनुरोध किया कि उनके समुदाय में नशाखोरी, अंधविश्वास, झाड़ फूंक आदि से समाज काफी पिछड़ रहा है। उन्होंने एसडीएम से अनुरोध किया कि इनके विरुद्ध प्रशासनिक मुहिम चलाई जाए। सामाजिक कार्यकर्ताओं का पूरा सहयोग प्रशासन को मिलेगा।

सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण पर बल: प्रतिनिधियों ने सरहुल, करमा जैसे पारंपरिक पर्वों एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय कृषि पद्धतियों एवं सामाजिक मूल्यों को संरक्षित और प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी।

सरकारी योजनाओं की पहुंच में जमीनी चुनौतियों पर चर्चा: बैठक में विभिन्न सरकारी योजनाओं—पेंशन, आवास, राशन, मनरेगा एवं आजीविका मिशन की जमीनी स्थिति पर भी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने घुमकुड़िया में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति, नए घुमकुड़िया निर्माण, सरना स्थल की घेराबंदी, डाकिया योजना में पारदर्शिता आदि के मुद्दे उठाए। प्रतिभागियों ने योजनाओं के लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित किया। जिनको दूर करने के लिए एसडीएम ने यथासंभव प्रयास करने का भरोसा जताया।

प्रशासन ने जताई प्रतिबद्धता: एसडीएम संजय कुमार ने सभी प्रतिभागियों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि आदिवासी समाज के विकास एवं अधिकारों का संरक्षण प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उठाए गए मुद्दों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद से प्रशासन को जमीनी हकीकत समझने का अवसर मिलता है और समाज के साथ मिलकर बेहतर समाधान निकाले जा सकते हैं।

संवाद से मजबूत हुआ विश्वास: बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। एसडीएम ने आगंतुक सभी आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। प्रतिभागियों ने इस प्रकार के संवादात्मक मंच की सराहना करते हुए कहा कि इससे उनकी आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचती है। प्रशासन की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया कि आगे भी समाज के विभिन्न वर्गों के साथ इस तरह के संवाद निरंतर जारी रहेंगे।

मौजूद थे: संवाद कार्यक्रम में लवली टोप्पो, उमेश उरांव, सुखबीर उरांव, मौसम उरांव, चतुर्गुण बैगा, गोपाल कुजूर, मनी परहिया, मंजू देवी खरवार, सुरेश परहिया, सुनील उरांव, सोहराय उरांव, देवनाथ उरांव, योगेंद्र उरांव, महेंद्र उरांव, पंचन उरांव, जगदीश उरांव आदि मौजूद थे।

Tags

About Author

Follow Us On Social Media