सभी शिवालयों, शिव मंदिरों व शिव स्थानों पर देर शाम तक होती रही महाशिवरात्रि की पूजा

सभी शिवालयों, शिव मंदिरों व शिव स्थानों पर देर शाम तक होती रही महाशिवरात्रि की पूजा

महाशिवरात्रि का सबसे बड़ा पूजनोत्सव श्री बंशीधर नगर के राजा पहाड़ी व भवनाथपुर के शिव गुफा में रहा

आज के पावन दिन को कांडी थाना प्रभारी मो अशफाक आलम ने थाना प्रांगण में शिव मंदिर निर्माण की घोषणा की



दिवंगत आशुतोष रंजन


प्रियरंजन सिन्हा
बिंदास न्यूज, गढ़वा


गढ़वा : महाशिवरात्रि के व्रत को लेकर सभी शिवालयों, शिव मंदिरों एवं शिव स्थानों पर पूजा अर्चना करने वालों की देर शाम तक भीड़ लगी रही। इस दौरान निराहार व्रतियों ने भगवान शिव पर अक्षत, रोड़ी, चंदन, कनेर एवं अकवन के फूल, धतूरा के फूल एवं फल, बेर भांग के साथ-साथ जलार्पण किया। इस दौरान काफी संख्या में महिला व्रतियों ने भगवान शिव की पूजा अर्चना के साथ-साथ देर शाम तक शिव का भजन एवं पूजन का गीत गाया। आज के दिन कांडी थाना प्रभारी मोहम्मद अशफाक आलम ने थाना प्रांगण में शिव मंदिर निर्माण की घोषणा की। जिसकी लोगों ने खूब सराहना की। जिला में सबसे बड़ा उत्सव श्री बंशीधर नगर की राजा पहाड़ी शिव मंदिर व भवनाथपुर की शिव गुफा मंदिर में देखा गया। गढ़वा थाना के शिव मंदिर में भी पूजा अर्चना करनेवालों की भीड़ लगी रही। कई जगह मेला भी लगा। वैसे इस दौरान सबसे अधिक व्रतियों की भीड़ प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ में देखी गई। यहां पर कतिपय श्रद्धालुओं ने मनोरम झरना में स्नान करके भगवान शिव, नंदी महाराज के साथ-साथ अन्य सात मंदिरों की श्रृंखला में भी दर्शन पूजन किया। इसके साथ ही विलक्षण शिवलिंग वाले चोका शिव मंदिर, भिलमा, अधौरा, सेमौरा, बलियारी, खरौंधा, घटहुआं कला, रतनगढ़, कांडी, कसनप आदि गांवों के शिव मंदिरों के साथ-साथ ऐतिहासिक गरदाहा शिवालय तथा सभी गांव के शिव स्थानों पर पूजा करने वालों का तांता लगा रहा। इस मौके पर अधिकांश शिव मंदिरों के साथ-साथ सतबहिनी झरना तीर्थ के भव्य शिव मंदिर में पुजारी पंडित आदित्य पाठक ने श्रद्धालु व्रतियों को महाशिवरात्रि की कथा सुनाई। इस मौके पर पुजारी पंडित प्रवीण पांडेय भी उपस्थित थे। कथा के अनुसार महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक व्रतों में से एक है। इस दिन भगवान शिव के भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से शिव जी की पूजा करते हैं। शिव पूजन के साथ ही महाशिवरात्रि के दिन को आध्यात्मिक जागृति का दिन भी कहा जाता है। इस दिन योग-ध्यान करने से मानसिक सुख की प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत ही महत्व है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिव-शक्ति एक हुए थे यानि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए महाशिवरात्रि के पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं कुछ मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन पर ही भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष का पान किया था और संसार की रक्षा की थी। इसलिए भी महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। कुछ धार्मिक ग्रंथों में इस दिन शिवलिंग की उत्पत्ति भी बताई गई है। महाशिवरात्रि का व्रत चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है और इस तिथि के स्वामी साक्षात भगवान शिव हैं। ईशान संहिता में वर्णित है कि इसी दिन ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव का प्रकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। उपनिषदों में वर्णित है कि शिवलिंग में सभी देवी-देवताओं का वास है। संपूर्ण सृष्टि भी इसी में समाई हुई है। इसलिए महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिवलिंग और महादेव की पूजा करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक दृष्टि से इस दिन शिव पूजन, मंत्र जप आदि करने से आप पर शिव की कृपा बरसती है। हिंदू धर्म में शिव केवल महादेव का नाम नहीं है। बल्कि ये उस परम आत्मा का नाम भी है जो सभी में विद्यमान है। शिव का एक अर्थ सदा कल्याणकारी भी है। आत्मा का कल्याण आध्यात्मिक जागरण से ही होता है और महाशिवरात्रि के दिन योग-ध्यान के जरिए परम सत्य की प्राप्ति कर सकते हैं। इसलिए आध्यात्मिक दृष्टि से भी महाशिवरात्रि के दिन को बेहद खास माना जाता है। इस दिन ध्यान करने से काम, क्रोध, मोह और लोभ जैसे विकारों से मुक्ति मिलती है और चेतना का विकास होता है। इस दिन सांसारिक सुखों से हटकर शिव पूजन करने पर शान्ति, पवित्रता और प्रेम का विकास होता है।

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Ashutosh Ranjan

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